अम्बिकापुर, 10 मई 2026। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (FAC) की आज नई दिल्ली में होने वाली बैठक में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित तथा अदानी समूह के एमडीओ वाली केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को वन स्वीकृति देने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार पहले ही इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार को वन स्वीकृति की अनुशंसा भेज चुकी है।
इधर, पूर्व उप मुख्यमंत्री T. S. Singh Deo ने बैठक से पहले FAC सदस्यों से फोन पर चर्चा कर ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भेजे हैं। उन्होंने ऐतिहासिक रामगढ़ स्थल के संरक्षण और हसदेव अरण्य क्षेत्र की जैव विविधता को बचाने के लिए केते एक्सटेंशन कोल माइन को वन स्वीकृति नहीं देने अथवा प्रस्ताव खारिज करने की मांग की है।

टीएस सिंहदेव ने FAC के समक्ष रखे अपने दस्तावेजों में कहा है कि इस परियोजना के लिए 1,742.155 हेक्टेयर घने जंगल की भूमि का उपयोग किया जाएगा, जिससे लगभग 7 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई होगी। उन्होंने चेताया कि इससे न केवल समृद्ध वन क्षेत्र, जैव विविधता, हसदेव नदी और बांगो जलाशय पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा, बल्कि भविष्य में छत्तीसगढ़ के पर्यावरणीय संतुलन को भी भारी नुकसान हो सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र के समीप स्थित ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ियां, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक क्षेत्र का हिस्सा हैं, पहले से ही खनन गतिविधियों के कारण प्रभावित हो रही हैं। उनके अनुसार, खदान की वास्तविक दूरी रामगढ़ पहाड़ियों से लगभग 8 किलोमीटर है, लेकिन रिपोर्ट में इसे गलत तरीके से 10 किलोमीटर से अधिक दर्शाया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि पहाड़ियों में और दरारें आईं तो रामगढ़ की प्राचीन गुफाएं और मंदिर भी खतरे में पड़ सकते हैं।

पूर्व उप मुख्यमंत्री ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून की 2021 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि संस्था ने PEKB-I को छोड़कर बाकी सभी नई खदानों, विशेष रूप से केते एक्सटेंशन को “नो गो एरिया” घोषित करने की सिफारिश की थी। वहीं ICFRE देहरादून की रिपोर्ट में भी ‘चोरनाई वाटरशेड’ क्षेत्र में खनन पर रोक लगाने की अनुशंसा की गई थी। उन्होंने कहा कि केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी संवेदनशील जलग्रहण क्षेत्र में आता है।
उन्होंने FAC का ध्यान 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित उस सर्वसम्मत प्रस्ताव की ओर भी आकर्षित कराया, जिसमें हसदेव अरण्य क्षेत्र में नई कोयला खदानों का विरोध किया गया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में वन विभाग द्वारा दायर हलफनामे का उल्लेख करते हुए कहा गया कि वर्तमान PEKB खदान में ही लगभग 350 मिलियन टन कोयला भंडार शेष है, जो आगामी 20 वर्षों तक 4340 मेगावाट क्षमता वाले बिजली संयंत्रों की आवश्यकता पूरी करने के लिए पर्याप्त है। ऐसे में नए खनन क्षेत्र की आवश्यकता नहीं है।
पूर्व उप मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गए अपने दस्तावेजों की प्रतियां भी साझा करते हुए रामगढ़ के ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व को सुरक्षित रखने की मांग की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि फॉरेस्ट एडवायजरी कमेटी सभी तथ्यों पर गंभीरता से विचार करते हुए रामगढ़ और हसदेव अरण्य क्षेत्र के संरक्षण हेतु आवश्यक निर्णय लेगी।