केशकाल :- विकास कार्यों के नाम पर बड़ी लापरवाही का सनसनीखेज मामला सामने आया है। केशकाल बायपास परियोजना में वन विभाग और नेशनल हाईवे विभाग की गंभीर चूक के चलते जहां सड़क निर्माण की जरूरत ही नहीं थी, वहां हजारों हरे-भरे पेड़ों की कटाई कर दी गई। अलाइनमेंट से हटकर हुई इस कटाई ने न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया, बल्कि शासन को भी लाखों-करोड़ों रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाई है।विस्तार न्यूज की पड़ताल में सामने आया कि वर्ष 2016-17 में नेशनल हाईवे विभाग द्वारा वन विभाग को जो अलाइनमेंट मैप सौंपा गया था, उसी के आधार पर पेड़ों की कटाई की गई। लेकिन 11 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित बायपास में करीब 5 किलोमीटर हिस्सा गलत अलाइनमेंट पर निकला।

परिणामस्वरूप हजारों पेड़ ऐसी जगह काट दिए गए, जहां सड़क निर्माण होना ही नहीं था।अब जब परियोजना को दोबारा शुरू करने की तैयारी चल रही है, तब एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। सही अलाइनमेंट पर निर्माण के लिए करीब 6 हजार से अधिक पेड़ों की फिर से कटाई की तैयारी की जा रही है। यानी एक ही परियोजना में पर्यावरण पर दोहरी मार पड़ने वाली है।
मामले के उजागर होते ही वन विभाग और नेशनल हाईवे विभाग के बीच जिम्मेदारी तय करने को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। वहीं वन विभाग के उप सचिव ने मामले को गंभीर मानते हुए सीसीएफ कांकेर से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस गंभीर लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? क्या पर्यावरण को हुए भारी नुकसान की भरपाई हो पाएगी? और क्या दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा? फिलहाल पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और विकास परियोजनाओं की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए है।