रायपुर: पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय में ‘न्याय’ का तमाशा! शैलेंद्र पटेल को साजिश का शिकार बनाया, हाईकोर्ट के फैसले ने छत्तीसगढ़ के सिस्टम की खोली पोल…

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रायपुर : वाह रे छत्तीसगढ़ का उच्च शिक्षा तंत्र! जहां योग्यता और मेहनत का इनाम साजिश और मनमानी से दिया जाता है! पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव शैलेंद्र पटेल, जो पिछले तीन साल से बखूबी कुलसचिव का प्रभार संभाल रहे थे, को उच्च शिक्षा विभाग ने ऐसी साजिश के जाल में फंसाया कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की निष्पक्ष चयन प्रक्रिया भी धरी की धरी रह गई। 22 मई 2025 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया, लेकिन यह फैसला कम, तमाशा ज्यादा लगता है! शैलेंद्र पटेल ने इस ‘न्याय’ के नाटक के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील करने की ठानी है।

सीजीपीएससी की मेहनत पर ‘मनमानी’ का तड़का

शैलेंद्र पटेल, एक मेहनती और योग्य अधिकारी, जिन्हें 2016 में सीजीपीएससी ने उप-कुलसचिव के रूप में चुना था, ने 2021 में कुलसचिव पद के लिए परीक्षा दी। Psc द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति , जिसकी अध्यक्ष उच्च शिक्षा विभाग के द्वारा नामित सदस्य थे,उनकी योग्यता पर मुहर लगाई, और ओबीसी वर्ग में उनका चयन हुआ। लेकिन उच्च शिक्षा विभाग को शायद यह मंजूर नहीं था कि कोई ‘मात्र’ योग्य व्यक्ति कुलसचिव बन जाए! विभाग ने अपनी एक छोटी सी समिति बनाकर सीजीपीएससी के निर्णय को पलट दिया, यह कहते हुए कि पटेल मध्य प्रदेश विश्वविद्यालयीन सेवा नियम, 1983 के तहत योग्य नहीं हैं।

जब नियम कहता है कि योग्यता का अंतिम फैसला लोक सेवा आयोग का है, तो यह एक या दो लोगों की समिति कौन सी है, जो Psc द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति , जिसकी अध्यक्ष उच्च शिक्षा विभाग के द्वारा नामित सदस्य थे के फैसले को कूड़ेदान में फेंक दे! क्या यह साफ-साफ साजिश नजर नहीं !

पटेल की योग्यता पर सवाल ! या सिस्टम की नीयत पर

पटेल, जो 2016 से बस्तर विश्वविद्यालय और 2018 से रायपुर में उप-कुलसचिव के रूप में सेवा दे रहे हैं, मई 2022 से कुलसचिव का प्रभार संभाल रहे हैं। तीन साल तक बिना किसी शिकायत के प्रभार निभाने वाले इस अधिकारी की योग्यता पर अब सवाल उठ रहे हैं! हाईकोर्ट ने कहा कि उनके पास 15 साल का प्रशासनिक अनुभव या 8 साल का उप-कुलसचिव का अनुभव नहीं है। लेकिन जरा रुकिए ! जब सीजीपीएससी ( Psc )द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति , जिसकी अध्यक्ष उच्च शिक्षा विभाग के द्वारा नामित सदस्य थे,उनकी योग्यता को मंजूरी दी थी, तो उच्च शिक्षा विभाग की इस छोटी सी समिति को कौन सा जादुई चश्मा मिल गया, जो पटेल के अनुभव को ‘अदृश्य’ बता रहा है।

हाईकोर्ट का फैसला: ‘न्याय’ या साजिश की जीत….

हाईकोर्ट का फैसला कहता है कि पटेल के पास जरूरी अनुभव नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि अगर अनुभव ही कमी थी, तो सीजीपीएससी ने उन्हें कैसे चुना ! क्या Psc द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति , जिसकी अध्यक्ष उच्च शिक्षा विभाग के द्वारा नामित सदस्य थे को नियमों की जानकारी नहीं थी!

पटेल के समर्थकों का क्या कहना है जानें

पटेल के समर्थक इसे साजिश का हिस्सा मानते हैं। समर्थक कहते हैं कि उच्च शिक्षा विभाग ने जानबूझकर पटेल के अनुभव को कम आंका और सत्यापन प्रक्रिया को मजाक बना दिया। यह फैसला न केवल पटेल के साथ षड्यंत्र है, या व्यक्तिगत राजनीति !, क्या सीजीपीएससी की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाने की कोशिश नहीं है।समर्थक यह भी कहते हैं कि ओबीसी /छत्तीसगढ़ के मूल निवासी के साथ अन्याय हुआ है और फार्मेसी विभाग के प्रोफेसर अम्बर ब्यास जो छत्तीसगढ़ से बाहर को मिला प्रभार पर सवाल खड़ा उठ रहा। जनता कहती हैं कि शिक्षा का अपना मुल काम छोड़ आऊ भगत में हैं क्या!

सिस्टम का नाच, जनता गुस्से में

यह मामला सिर्फ शैलेंद्र पटेल का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा तंत्र में गहरे भ्रष्टाचार और मनमानी का जीता-जागता सबूत है। अगर सीजीपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था के फैसले को एक छोटी सी समिति पलट सकती है, तो फिर चयन प्रक्रिया का क्या मतलब ! यह फैसला उक्त विज्ञापन के तहत चुने गए अन्य उम्मीदवारों के लिए भी खतरे की घंटी है। जनता भी दबी आवाज में पूछ रही है—क्या छत्तीसगढ़ में योग्यता की कोई कीमत नहीं! क्या सिस्टम केवल साजिश और पक्षपात के लिए बना है!

पटेल की हुंकार: “लड़ाई अभी बाकी है!”

मिली जानकारी के मुताबिक शैलेंद्र पटेल ने हार नहीं मानी है। वे डिवीजन बेंच में अपील करने जा रहे हैं। यह मामला “यह सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की लड़ाई है जो निष्पक्षता में यकीन करता है। वे वर्तमान में उप-कुलसचिव के पद पर हैं और कुलसचिव का प्रभार संभाल रहे थे, जिस पर हाईकोर्ट का यह फैसला लागू नहीं होता क्योंकि (hns 24 news:देखिए हाई कोर्ट के फैसले को हम सर आंखों पर सम्मान करते हैं, न्यायालय के फैसले की हम सम्मान करते हैं,हम उनका दिल से सम्मान करते हैं) ,लेकिन हाई कोर्ट का फैसला तो कुलसचिव पद के लिए मामला चल रहा था, शैलेंद्र पटेल ने कुलसचिव पद के लिए हाई कोर्ट में चैलेंज किया था जो कि उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया।

लेकिन सवाल यह है कि जब वे प्रभार संभालने के लिए योग्य हैं, तो स्थायी नियुक्ति के लिए अयोग्य कैसे!

जनता की मांग: साजिश की जांच हो!

यह मामला छत्तीसगढ़ के शिक्षा तंत्र में सुधार की जरूरत को चीख-चीखकर बयां करता है। लोग मांग कर रहे हैं कि उच्च शिक्षा विभाग की इस मनमानी की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों को सजा दी जाए। जनता दबे आवाजों से पूछ रही है कि क्या यह साजिश किसी बड़े अधिकारी के इशारे पर रची गई! क्या सीजीपीएससी की स्वायत्तता को खत्म करने की कोशिश हो रही है! ये सवाल अब जनता के मन में गूंज रहे हैं।

पटेल की अपील डिवीजन बेंच में जल्द सुनवाई के लिए आएगी। उनके समर्थक उम्मीद कर रहे हैं कि डिवीजन बेंच इस साजिश के पर्दे हटाएगी और पटेल को उनका हक दिलाएगी लेकिन तब तक, यह मामला छत्तीसगढ़ के सिस्टम की उस सच्चाई को उजागर करता रहेगा, जहां योग्यता को कुचलकर साजिश को ताज पहनाया जाता है। जनता की निगाहें अब डिवीजन बेंच पर हैं—देखते हैं, क्या सच की जीत होगी, या सिस्टम का यह तमाशा यूं ही चलता रहेगा…

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