चित्रा पटेल : धरमजयगढ़, रायगढ़ : 27मई 2025 ,धरमजयगढ़ की राशन व्यवस्था में लूट का काला खेल खुलकर सामने आ गया है। एक तरफ 88,854 रुपये की छोटी-सी गड़बड़ी करने वाले दुकानदार को 24 घंटे में जेल की हवा खिला दी गई, वहीं 22 लाख रुपये से ज्यादा का राशन हड़पने वाले मालदार घोटालेबाज आज भी आजादी का मजा ले रहे हैं। और यह सब तब, जब एसडीएम ने साफ-साफ आदेश दे रखा है! सवाल गूंज रहा है—क्या गरीबों का राशन लूटने वालों को कोई ‘बड़ा हाथ’ बचा रहा है?
एसडीएम का हुक्म बेकार, खाद्य अधिकारी की खामोशी संदिग्ध :-
धरमजयगढ़ के एसडीएम धनराज मरकाम ने राशन घोटालों पर नकेल कसने की ठानी,15 मई को जबगा राशन दुकान में 88,854 रुपये की गड़बड़ी पकड़ी गई, तो चौबीस घंटे के भीतर एफआईआर हुई और दुकानदार भगवान सिंह को जेल की सैर करा दी गई। लेकिन रूवाफुल राशन दुकान में 22 लाख रुपये से ज्यादा की लूट का मामला? वहां 8 मई को दिया गया एसडीएम का आदेश धूल फांक रहा है। खाद्य अधिकारी सुधा चौहान की चुप्पी चीख-चीखकर सवाल पूछ रही है।
यह लापरवाही है या साजिश!
- 22 लाख की लूट, फिर भी कोई सजा नहीं….
निश्चय नया सवेरा स्व-सहायता समूह की रूवाफुल राशन दुकान में…. - 533.81 क्विंटल चावल, यानी 22,21,717 रुपये की लूट।
- चना, शक्कर, नमक समेत कुल गबन: 22,39,525.88 रुपये।
एसडीएम ने 8 मई को खाद्य अधिकारी को साफ आदेश दिया—तुरंत एफआईआर करो! लेकिन चार महीने बाद भी न एफआईआर, न गिरफ्तारी, न कोई जवाब। यह खुली गुंडागर्दी नहीं तो और क्या है!
एक अधिकारी, दो रवैया: किसे बचा रही हैं खाद्य अधिकारी,कब करेंगी तगड़ा कार्रवाई, कब करेंगी नकेल।
पहला मामला : – भगवान सिंह पर 88 हजार की गड़बड़ी का इल्जाम—24 घंटे में एफआईआर, गिरफ्तारी, जेल।
दूसरा मामला : – रामचरण चौहान और उनकी टोली पर 22 लाख की लूट का इल्जाम—न एफआईआर, न सजा, न कोई कार्रवाई।
22 लाख की लूट करने वाले किसी रसूखदार की छत्रछाया में हैं! या ऊपर से कोई ‘हुक्म’ इस कार्रवाई को दबा रहा है….सवाल उठ रहा,जनता पूछ रही…धरमजयगढ़ की जनता अब तल्ख सवाल पूछ रही है….
– खाद्य अधिकारी सुधा चौहान पर उठ रहे हैं सवाल। खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल कब कसेंगे नकेल। 22 लाख का राशन लूटने वाले आजाद क्यों घूम रहे हैं…
गरीबों का निवाला छीनने वालों को अगर यूं ही खुली छूट मिलेगी, तो प्रशासन पर से लोगों का भरोसा उठ जाएगा । अगर प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो जनता सड़कों पर उतरने को तैयार में है। यह जंग अब सिर्फ राशन की नहीं, बल्कि गरीबों के हक और प्रशासन की जवाबदेही की है।