रायपुर : राजधानी रायपुर के खमारडीह थाना क्षेत्र के अनुपम नगर में 11 फरवरी को नगरीय निकाय चुनाव के दिन दिनदहाड़े मनोहरण वेलू के घर में आर्मी की वर्दी पहने डकैतों ने की वारदात को अंजाम. इस घटना पर रायपुर पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की संयुक्त टीम ने 36 घंटे के दौरान डकैती में शामिल सभी 10 आरोपियों को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपियों को नागपुर और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया गया है. डकैती के पीछे की मुख्य वजह पुलिस ने बताया कि प्रॉपर्टी और हिस्से को लेकर पीड़ित की बहन ने अपने एक मित्र जो कि बीएसएफ का रिटायर्ड सूबेदार है. उनके साथ मिलकर इस पूरी योजना को अंजाम दिया था. पकड़े गए सभी आरोपियों के खिलाफ खमारडीह पुलिस ने धारा 310 (2) 331 (5) 123, 351 (3) बीएनएस 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत कार्यवाही की है.
रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने कहा कि “11 फरवरी को अनुपम नगर में हुई डकैती में रायपुर पुलिस ने काफी बड़ी सफलता हासिल की है. इसके लिए उन्होंने रायपुर एसएसपी और उनकी पूरी टीम को बधाई दी. बताया कि 36 घंटे के अंदर 10 आरोपी और डकैती में 59 लाख 50 हजार रुपए सहित सोने चांदी के जेवर बरामद किए हैं, जिसकी कुल कीमत लगभग 70 लाख रुपए के आसपास है. डकैती का उद्देश्य को लेकर उन्होंने बताया कि परिवार में पैसे को लेकर जो चिंताएं होती है उसी को लेकर इस डकैती की वारदात को अंजाम दिया गया था. पैसा और प्रॉपर्टी में बटवारा को लेकर उक्त घटना को अंजाम दिया गया था. पीड़ित की एक बहन ने अपने एक मित्र रिटायर्ड सूबेदार मेजर के साथ मिलकर डकैती की इस पूरी वारदात को अंजाम दिए थे. इस पूरी घटना में तीन लेयर में पूरी कांट्रैक्टिंग की गई थी. डकैती की वारदात को अंजाम देने वाले पांच लोग थे. जिसमें 2 नागपुर के 1 बिलासपुर से राजनादगांव और दुर्ग के रहने वाले 5 आरोपी घर के अंदर घुसे थे. बाकी 5 आरोपी रेकी करने के साथ ही पुलिस टीम पर निगरानी रखने साथ ही साथ एंटी मेजर डिटेक्शन मोबाइल को एक जगह इकट्ठा करके में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. डकैती की वारदात को अंजाम देने के बाद पैसे का बंटवारा पूरी तरह से कर लिए थे. इन आरोपियों में से एक आरोपी बाहर भागने की फिराक में भी था. पुलिस के पास अभी समय है कि उन्हें जेल भेजा जाएगा या फिर उनकी पुलिस रिमांड ली जाएगी.”
पीड़ित मनोहरण वेलु ने पुलिस को बताया कि “वह अनुपम नगर के मकान नंबर डी 14 में किराए के मकान में रहता है. उसके साथ उसकी बहन प्रेमा और रजनी भी साथ में रहते हैं. 11 फरवरी की दोपहर लगभग 3:00 बजे दोनों बहनों के साथ घर में पीड़ित बैठक रूम में बैठा हुआ था. उसकी बहन रजनी भी बगल में बैठी हुई थी. दूसरे कमरे में उसकी बहन प्रेमा सोई हुई थी. इस समय घर में दो व्यक्ति आर्मी की वर्दी पहने अंदर आने के बाद रुमाल से मुंह को ढक कर बोले कोई कंप्लेंट किया है. उसी का बातचीत करने आए हैं. ऐसा बहाना बताते हुए डकैतों ने उन्हें बंधक बनाकर अपने पास रखे पिस्टल से आवाज निकालने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी. इसके साथ ही हाथ और मुंह में टेप लगा दिया गया था. इतना सब करने के बाद डकैतों ने 60 लाख रुपए सहित घर में रखे लगभग 10 लाख रुपए के सोने चांदी के जेवरात और पीड़ितों के तीन मोबाइल को लेकर भाग निकले थे.”
डकैती की घटना होने के बाद पुलिस ने क्राइम ब्रांच की 10 टीमों का गठन कर पीड़ित और उसकी दोनों बहनों से घटना के संबंध में विस्तृत पूछताछ करने के बाद सभी थानों को इसकी सूचना दे दी गई थी. सरहदी जिलों में नाकेबंदी की गई थी. डॉग स्क्वाड और फोरेंसिक टीम के साथ ही क्राइम ब्रांच की टेक्निकल टीम को भी साक्ष्य जुटाने के लिए लगाया गया था. क्राइम ब्रांच की टेक्निकल टीम के द्वारा घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज के अवलोकन करने के बाद एक महिला जो पीले रंग का सलवार सूट पहनी थी. मुंह में स्कार्फ बांधी थी. इसके साथ ही चार पुरुष थे जिसमें दो लोग आर्मी की वर्दी पहने थे और दो सामान्य ड्रेस पहने हुए थे. ये 5 आरोपी सफेद रंग की बिना नंबर की रीजड कार से आने के बाद डकैती की वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हो गए थे.
पुलिस की टीम ने योजना बनाकर एक साथ राजनाथ गांव दुर्ग बिलासपुर नागपुर बलोदा बाजार रायपुर में दबिश देकर संदिग्ध लोगों से जब पूछताछ की तो उन्होंने डकैती की वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की. इसके साथ ही आरोपियों ने पुलिस को बताया की डकैती में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और पहने हुए कपड़ों को रास्ते में फेंकना बताया. पुलिस की जांच में यह बात सामने आई की ए. सोम शेखर बीएसएफ से सूबेदार के पद से साल 2011 में रिटायर्ड हुआ है जो कि वर्तमान में रियल हेल्प नामक एनजीओ से जुड़ा हुआ है. इसके साथ ही वह जमीन दलाली का भी कार्य करता है. इसका पीड़ित के परिवार से घरेलू संबंध था और उसे घर में पैसे रखे होने की पूरी जानकारी थी. उसी ने डकैती की यह योजना अपने साथी देवलाल वर्मा जो की बिजली मिस्त्री है और कमलेश वर्मा जो की देवलाल वर्मा का ड्राइवर है वह भी जमीन के दलाली का कार्य करते हैं. उसको इस योजना में शामिल करके अपने साथी देवलाल वर्मा और कमलेश वर्मा को जमीन खरीददार बताकर पीड़ित के घर को दिखाया था. उन्हें घर में रखे नगदी रकम की जानकारी दी थी.”
डकैती की घटना में शामिल आरोपी शाहिद पठान पूर्व में भी अमानत में खयानत के मामले में महाराष्ट्र के अहमदनगर जेल जा चुका है. अन्य आरोपियों में पुरुषोत्तम देवांगन अजय ठाकुर राहुल त्रिपाठी नेहा त्रिपाठी नागपुर महाराष्ट्र के रहने वाले शाहीद पठान और पिंटू सारवान बिलासपुर के रहने वाले निवासी मनु राजमौर्य को योजना के बारे में बताकर अपने साथ शामिल किया गया था.