ब्रेक…बर्खास्तगी के विरोध में 12 हजार से अधिक मनरेगा कर्मियों ने दिया इस्तीफा

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रायपुर। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पदस्थ मनरेगा के 21 सहायक परियोजना अधिकारियों को बर्खास्त किए जाने के बाद आंदोलन पर बैठे आक्रोशित मनरेगा कर्मचारी संघ के 12000 कर्मियों ने शनिवार को सामूहिक इस्तीफा दे दिया। बताया जाता है कि विभागीय अधिकारियों ने शुक्रवार को 21 सहायक परियोजना अधिकारियों को नौकरी से निकालने का आदेश जारी किया था। ये सभी संविदा पर काम कर रहे थे। संविदा पर काम कर रहे इन कर्मियों की जगह विभाग के नियमित अफसरों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इधर, राज्य सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियाें टीएस सिंहदेव व रविंद्र चौबे ने एक बार फिर मनरेगा कर्मियों से काम पर लौटने की अपील की है। साथ ही कहा है कि अगर कर्मी नहीं माने, तो नई भर्ती करनी होगी।
मनरेगा कर्मचारी संघ के प्रदेश प्रवक्ता सूरज सिंह ने कहा, यह कार्रवाई कर सरकार हमें डराना चाहती है। आंदोलन को खत्म करना चाहती है, लेकिन इनकी यह रणनीति नहीं चलेगी। 12 हजार से अधिक मनरेगा कर्मचारियों ने आंदोलन के 62 वें दिन महारैली का आयोजन कर सामूहिक त्यागपत्र सौप दिया है। उन्होंने बर्खास्तगी आदेश को संवैधानिक अधिकारों का हनन करार दिया है। धरनास्थल में आदेश की प्रतियां जलाई गई। वादा निभाओ रैली में हजारों कर्मचारी शामिल हुए। मनरेगा कर्मचारी महासंघ ने कहा कि बर्खास्तगी आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। हम इसे छत्तीसगढ़ में लोकतांत्रिक अधिकारों की हत्या के रूप में देख रहे हैं।
नौकरी से इन्हें निकाला गया
विभाग के अनुसार रवि कुमार, मोहम्मद आरिफ रजा, शशिकांत गुप्ता, कृष्ण मोहन पाठक, संदीप डिकसेना, विजेंद्र सिंह, विनायक गुप्ता, रोशनी तिवारी, अनुराधा शुक्ला, मनीष सोनवानी, राजेश वर्मा, रितु कोसरिया, त्रिलोकी प्रसाद, पवन सिंह, फैज मेमन, ओमप्रकाश साहू, नवीन कुमार साहू, प्रदीप डीडी, धर्म सिंह, बुद्धेश्वर साहू और कृष्ण कांत साहू को नौकरी से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया गया था।
यह है मांग
छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ 2 सूत्रीय मांग के साथ आंदोलन कर रहा है। कांग्रेस के जनघोषणा पत्र के मुताबिक समस्त मनरेगा कर्मियों का नियमितीकरण किया जाए। नियमितीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक ग्राम रोजगार सहायकों का वेतनमान निर्धारण करते हुए मनरेगा कर्मियों पर सिविल सेवा नियम बनाया जाए। मनरेगा कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि इन मांगों के माने जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।
नहीं मानेंगे तो नई भर्ती करनी पडेगी- टीएस
मनरेगा के 21 सहायक परियोजना अधिकारियों की बर्खास्तगी के बाद 12 हजार कर्मियों की इस्तीफे को लेकर पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि यह सही है कि मनरेगा कर्मियों का वेतन कम है। वे इसके लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके प्रदर्शन से 600-700 करोड़ का काम प्रभावित हो रहा है। राज्य सरकार को मैनें इस संबंध में प्रस्ताव दिया है। मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद एक समिति का गठन उनकी मांगों पर विचार के लिए किया गया है। उन्हें काम पर लौटना चाहिए। उन्होंने मनरेगा कर्मियों से अनुरोध किया है कि वे काम पर लौट आएं। मंत्री ने साफतौर पर कहा कि अगर कर्मी नहीं लौटे और इस पर अड़े रहे तो इस्तीफा देने वाले कर्मियों की जगह नई भर्ती करनी ही पड़ेगी।
कार्रवाई की शुरुआत -चौबे
राज्य सरकार के प्रवक्ता व कृषिमंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि मनरेगा के कर्मियों से अनुरोध है कि वे जिद छोड़कर काम पर लौटें। पिछले दो महीने से उनका आंदोलन चल रहा है। यही दो माह मनरेगा के काम के लिए महत्वपूर्ण होता है। राज्य में 36 लाख मानव दिवस काम की स्वीकृति हुई है। उनके हड़ताल से गरीबों, मजदूरों और छत्तीसगढ़ के लोगों को कितना नुकसान हुआ इसका अंदाजा नहीं लगा सकते। आंदोलन पर अडिग कर्मचारियों से मुख्यमंत्री ने चर्चा कर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। उसके बाद भी वे हड़ताल से नहीं लौटे, तो सरकार को जो कार्रवाई करनी चाहिए थी यह उसकी शुरूआत है।

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