ग्राम-डुमहा के देव स्थल, संतसमागम के जमीन पर पूरे परिवार का कब्जा

Chhattisgarh

आरंग : धार्मिक स्थान के लिए सुरक्षित जमीन पर कब्जा को लेकर ग्राम-डुमहा के प्रकरण सामने आए है, सड़क से लगे जमीन पर परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा की सुपुत्री माता सौहाद्र के पुत्र पीला दीवान बाबा का मठ समाधि स्थल 100 वर्ष पूर्व से हैं, आज सर्व समाज के लोग द्वारा आस्था का स्थल है।

प्रतिवर्ष संत समागम मेला का आयोजन होता है, सर्व समाज के सहमति से ईश्वरदास दीवान का समाधि बनाया गया है यह पूजनीय स्थल है,

जनपद पंचायत अध्यक्ष अखिलेश्वर देवांगन ने बताया कि इस देव स्थल एवं सामाजिक उत्थान स्थलों के लिए सुरक्षित हैं जिसे  पूर्व विधायक, द्वारा देवस्थल सामाजिक भवन के लिए सुरक्षित स्थानों को चार से पांच बार स्थल को अतिक्रमण किया गया ।

इस जमीन के विवाद पूर्व में तहसीलदार थाना प्रभारी खरोरा पटवारी के मौका जांच में जाकर विवाद को कई बार निपटारा किया गया, देव स्थल व सामाजिक भवन के लिए सुरक्षित स्थानों पर चार-पांच बार जेसीबी चलाकर अतिक्रमण किये, और पूर्व विधायक के परिवार द्वारा दबंगई करते हुवे बार-बार अतिक्रमण करने से गांव में अशांति का माहौल है। पूर्व में भी समाज द्वारा और ग्रामीणों द्वारा समझाइश के बाद भी देव स्थल व समाजिक स्थान पर बार-बार कब्जा कर विवाद की स्थिति पैदा करते रहते हैं, पूर्व में भी पूर्व विधायक के परिवार सहित लाठी डंडा के साथ दबंगई पूर्वक पूरे देवी स्थल को कब्जा कर लिया गया है, जिससे प्रत्येक वर्ष इस जमीन को अतिक्रमण से हटाया जाता है वैसी ही बलपूर्वक राजनीतिक धाक जमाकर इस जमीन को कब्जा कर लिए जाते हैं, जिसके विरोध में ग्रामीण व आसपास के सतनाम समाज के लोग जिलाधीश , मुख्य पुलिस अधीक्षक, आरंग अनुभागी अधिकारी एवं थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर, तत्काल प्रभाव से अवैध कब्जा की गई देव स्थल के जमीन को मुफ्त करें एवं बार-बार गांव में विवाद की स्थिति बनाने वाले जमीन पर कब्जा करने वाले पूर्व विधायक नवीन मार्कंडेय के परिवार सहित एफ, आई, आर, दर्ज कर अपराध दर्ज करने की मांग किया गया, नही तो उग्र आंदोलन किया जायेगा, जिसमें ज्ञापन सौंपने वाले में प्रमुख रूप से लक्ष्मण दीवान, राजकरण राय, संजय चतुर्वेदी, अली दत्त गिलहरे, लोचन बंजारे, धनेश्वर राय, साधे कोसले, लाला राम निषाद, मनु लाल निषाद, गुलशन ठाकुर, मुन्ना लाल निषाद, रतालू निषाद, आदि लोग भारी संख्या में उपस्थित थे।

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