मूणत ने कहा कि हाल ही ढाई-ढाई साल के मसले पर कांग्रेस में मचे हाहाकार

Chhattisgarh

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने कहा है कि केंद्रीय मंत्रियों का घमंड सातवें आसमान पर देख लेने वाले मुख्यमंत्री बघेल को अपने खुद का अहंकार नज़र नहीं आता। उन्होंने सवाल किया कि कोविड संकट में समय मांगने पर भी भाजपा अध्यक्ष तक से नहीं मिलने वाले अहंकारी सीएम किस मूंह से अहंकार की शिकायत कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार में बघेल को न तो अपने केंद्रीय नेताओं का ‘ख़ानदानी’अहंकार नज़र आ रहा है और न ही प्रदेश में अपने मंत्री-विधायकों से लेकर अन्य जनप्रतिनिधियों व कांग्रेस नेताओं का दर्प उन्हें सूझ रहा है। मूणत ने कहा कि बिना किसी हैसियत के घमंड तो राहुल गांधी का है जिन्होंने  बघेल के बार-बार घोषणा और अनुनय पर भी छत्तीसगढ़ आने की ज़हमत तक नहीं उठायी। इससे पहले मुख्यमंत्री बघेल को वाहन समेत सोनिया गांधी के बंगले में जाने नहीं दिया गया था, अहंकार उसे कहते हैं।  मूणत ने कहा कि हाल ही ढाई-ढाई साल के मसले पर कांग्रेस में मचे हाहाकार के दौरान दिल्ली पहुँचे प्रदेश के कांग्रेस विधायकों और मंत्रियों को सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा और राष्ट्रीय महामंत्री केसी वेणुगोपाल तो दूर, प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया तक ने कई दिनों तक मिलने का समय नहीं दिया था और फ़ोन पर ही उनसे चर्चा की थी। महामंत्री वेणुगोपााल से मिलने के लिए तो प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव को दिल्ली में डेरा डालना पड़ा था! प्रदेश के मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, सांसद अपने नेताओं तक से तो मिल नहीं पाते, और कहते हैं कि किसी का घमंड उन्हें ले डूबेगाा, तो क्या मुख्यमंत्री बघेल ऐसा कहकर अपने नेताओं को चेतावनी दे रहे हैं?

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व मंत्री  मूणत ने कहा कि मुख्यमंत्री बघेल ख़ुद कई मौक़ों पर अपने थोथे अहंकार का परिचय देते रहे हैं, प्रदेश के कांग्रेस विधायक-मंत्री और दीग़र जनप्रतिनिधि तथा कांग्रेस के नेता अपने राजनीतिक विरोधी हों या सरकारी अधिकारी-कर्मचारी, सबके साथ बदसलूक़ी करते, मारपीट करते देखे-सुने और पढ़े जा रहे हैं।  मूणत ने कहा कि अहंकार कांग्रेस के राजनीतिक डीएनए में समाया हुआ है। असम के मौज़ूदा मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा को कांग्रेस नेतृत्व के अहंकार ने ही तब कांग्रेस छोड़ने के लिए विवश किया था, जब कांग्रेस में रहते वे राहुल गांधी से गंभीर चर्चा करने पहुँचे थे और उन्होंने देखा कि उनकी बातों से ज़्यादा राहुल गांधी अपने कुत्ते को बिस्किट खिलाने में रुचि ले रहे थे। अहंकार की परिभाषा यह होती है, मुख्यमंत्री बघेल इस तथ्य को हमेशा गाँठ बांधकर रखें।
मूणत ने कहा कि जहाँ तक केंद्रीय मंत्रियों से मुलाक़ात का सवाल है, जब-जब प्रदेश के मुख्यमंत्री बघेल और उनके मंत्रियों ने ज़रूरत समझी, केंद्रीय मंत्रियों से दिल्ली में मिले, रायपुर से फ़ोन पर बात की, चिठ्ठियाँ लिखीं और केंद्रीय मंत्रियों ने यथासंभव छत्तीसगढ़ के हितों को देखते हुए प्रदेश सरकार को हर मोर्चे पर सहयोग किया। बावज़ूद इसके, प्रदेश सरकार और कांग्रेस केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ विषवमन करती रही। मूणत ने कहा कि पिछले 06 महीने में ही केंद्र सरकार के चार मंत्रियों हरदीपसिंह पुरी, फग्गन कुलस्ते, प्रह्लाद जोशी और गजेंद्र शेखाावत ने छत्तीसगढ़ का प्रवास किया है और प्रदेश सरकार से उनकी चर्चा भी हुई है। अब मुख्यमंत्री बघेल किस आधार पर यह कह रहे हैं कि केंद्रीय मंत्री प्रदेश के मंत्रियों का फ़ोन नहीं उठाते या उनसे चर्चा नहीं करते? उन्होंने कहा कि जब भी बघेल केंद्र को चिट्ठी लिखते हैं तो उसमें केवल स्तरहीन घटिया राजनीति के अलावा कुछ भी नहीं होता, इसीलिए दिल्ली पहुँचने से पहले ही मीडिया में पत्र लीक कर मुख्यमंत्री हर बार असभ्य आचरण करते हैं, फिर भी केंद्र सरकार सदाशय होकर हर बार उनकी बात सुनती है। उन्होंने कहा कि अपनी हर विफलता का ठीकरा केंद्र पर फोड़ने की बघेल की कोशिश अब सफल नहीं होगी। जनता इनकी अक्षमता और भ्रष्ट आचरण को अच्छी तरह समझ चुकी है।

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