झीरम की रिपोर्ट पर बवाल, कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल,  भाजपा ने कहा- पूरा सच सामने आए, नहीं चाहते कांग्रेसी

Chhattisgarh

रायपुर। झीरम न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपे जाने के मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे लेकर गहरी आपत्ति जताई है। भाजपा ने कहा, झीरम मामले में पूरा सच सामने आए यह कांग्रेसी नहीं चाहते। कांग्रेस ने कहा, राज्यपाल को रिपोर्ट पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा, आयोग राज्य सरकार ने बनाया और रिपोर्ट भी राज्य शासन को ही देना चाहिए था। सरकार को आयोग की रिपोर्ट खारिज करने और नया आयोग बनाने का पूरा अधिकार है। आयोग के द्वारा रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी जो उचित नहीं हैं। राज्यपाल को रिपोर्ट पर कार्रवाई या टिपण्णी करने का अधिकार नही है। राज्यपाल अविलंब पूरी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजे।
राजीव भवन में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में जांच आयोग के समक्ष कांग्रेस का पक्ष रखने एडवोकेट सुदीप श्रीवास्तव ने कहा, झीरम मामले में एनआईए को अपराध और षड्यंत्र की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। 28 मई 2013 को राज्य सरकार ने झीरम न्यायिक जांच आयोग को गठन करते हुए 9 बिंदुओं में जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। जांच में तय किए गए बिंदुओं में घटना किन परिस्थितियों में हुई। सुरक्षा व्यवस्था क्या थे। सुरक्षा बलों को वहां से हटाने पर प्रक्रिया का पालन किया गया कि नहीं। वहां पर निर्धारित सुरक्षा के इंतजाम थे कि नहीं। राज्य पुलिस बल और केंद्रीय बल के जवानों तैनाती और समन्वय का काम किसके जिम्मे था। ऐसी घटना को कैसे रोका जा सकता था और भविष्य में ऐसी घटना न हो इसके संबंध में सुझाव देना था। बाद में कांग्रेस सरकार बनने के बाद नए आठ बिंदु जोड़े गए। आयोग ने इस पर अगस्त में सुनवाई शुरू की और 11 अक्टूबर में पूरी कर ली गई। राज्य शासन से आयोग की कार्य अवधि और आगे बढ़ाने की मांग की गई थी। इस बीच अचानक रिपोर्ट तैयार कर राज्यपाल को सौंप दिया गया।
गवाहों को तर्क रखने का मौका नही दिया
श्रीवास्तव ने कहा, आयोग बनने के बाद अगस्त 2013 से दिसंबर 2017 गवाही जारी रही। कांग्रेस सरकार बनने के बाद जनवरी 2018 में पुर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर, सुशील शिंदे और आरपीएन सिंह को गवाह के रूप में बुलाने हेतु आवेदन आयोग को दिया गया। उक्त आवेदन पर सुनवाई कई बार बढ़ी और अंत में 22 अगस्त 2018 को सुनवाई हुई एवं आदेश सुरक्षित रख लिया गया। 7 जनवरी 2019 को उक्त आवेदन खारिज कर दिया गया। आयोग ने इसके बाद सुनवाई अचानक बंद करने का आदेश दिया। गवाहों को तर्क रखने का मौका नही दिया।
आखिर किस बात से डरी है कांग्रेस -साय
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा, राज्यपाल को रिपोर्ट सौंपे जाने पर कांग्रेस अपनी सत्ता की धौंस में समूची प्रक्रियाओं को अपनी मर्जी से संचालित करने की तानाशाही-मानसिकता से ग्रस्त है। उन्होंने पीसीसी अध्यक्ष  मरकाम की टिप्पणी को उनकी राजनीतिक नासमझी का परिचायक बताया और पूछा आख़िर किस बात से डरी हुई है कांग्रेस? उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की संवैधानिक व न्यायिक समझ पर संदेह करके कांग्रेस नेता प्रदेश को क्या संदेश देना चाह रहे हैं?

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