स्वामी विवेकानंद और अरविंद घोष के विचारों की प्रासंगिकता को किया व्याख्ति

Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ : रायपुर में साहित्य मंडल के 80 वर्ष पूरे होने पर वार्षिक अधिवेशन 2019 का आयोजन किया गया है. इस अधिवेशन में छत्तीसगढ़ के स्थानीय साहित्यिक रचनात्मकता के साथ –साथ कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ककसाड़ के संपादक, साहित्यकार व सामाजिक कार्यकर्ता डॉ राजाराम त्रिपाठी को “वागेश्वरी सम्मान 2018” से सम्मानित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य अमरनाथ त्यागी ने की. डॉ राजाराम त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि की आसंदी से अधिवेशन को संबोधित करते हुए कि आज के युवा भारत का आदर्श स्वामी विवेकानंद और आचार्य अरविंद घोष ही हो सकते हैं. हमारे देश में कई ऐसे कई महापुरूष हुए हैं, जिनके जीवन और विचार से कोई भी व्यक्ति बहुत कुछ सीख सकता है. उनके विचार ऐसे हैं कि निराश व्यक्ति भी अगर उसे स्वीकारे तो उसे जीवन जीने का एक नया मकसद मिल सकता है. स्‍वामी विवेकानंद ने हिंदुत्‍व को लेकर जो व्‍याख्‍या दुनिया के सामने रखी, उसकी वजह से भारत और भारतीयता के प्रति दुनिया का आकर्षण बढ़ा. वे औपनिवेशक भारत में राष्‍ट्रीयता की भावना जागृत करने के लिए जाने जाते हैं. इन्हीं वजहों से भारत में उनके जन्‍मदिन को युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है. इसी तरह अरविंद घोष विद्यार्थी जीवन से ही भारत की परतंत्रता को अत्यन्त ही दुर्भाग्यपूर्ण मानते थे। स्वतंत्रता हेतु संघर्षरत राजनीतिक संस्थाओं ‘इंडियन मजलिस’ तथा ‘द लौटस एण्ड डैगर’ के सम्पर्क में वे इंग्लैंड में आये। इंग्लैंड के प्रभुत्व के विरूद्ध संघर्ष कर रहे आयरिश स्वतंत्रता सेनानियों ने भी अरविन्द को उत्कृट देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत कर दिया। फिर वहां से लौटने के बाद अरविंद राष्ट्रीयता की भावना को बल देने के लिए राजनीति में आएं और उनका मानना था कि किसी देश या समाज का सकल कल्याण अध्यात्म से हो सकता है. उन्होंने आध्यात्मिक भारत का स्वप्न संजोया था.
डॉ त्रिपाठी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ढेरों साहित्यिक संस्थाएं काम कर रही है, लेकिन ये एकजुट न हो कर अलग-अलग तरीके से अलग-अलग दिशा में काम कर रहे है. अगर सभी एकजुटता से काम करें तो न केवल छ्त्तीसगढ़ साहित्यिक गढ़ बन सकता है बल्कि वरिष्ठ व बेसहारा साहित्यकारों को सहयोग भी किया जा सकता है. उन्होंने मंच से घोषणा की कि राजयपुर की सभी साहित्यिक संस्थाएं मिल कर एक ‘साहित्यकार कल्याण कोष’ बनायें, जिससे जरुरतमंद व बुजुर्ग साहित्यकारों को आर्थिक मदद दी जा सके. इस पहल के लिए उन्होंने स्वयं आगे बढ़ कर एक लाख एक हजार रुपये के आर्थिक सहयोग की पेशकश की.
दरअसल, बीते दिनों ककसाड़ पत्रिका को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की ओर से पुरस्कृत किया गया और पुरस्कार राशि के रूप में 51 हजार रुपये प्रदान किया गया. इसी के आलोक में कार्यक्रम के अध्यक्ष आचार्य अमरनाथ त्यागी जी ने मजाकिया अंदाज में उस पुरस्कार राशि में से 100 रुपये पर अपना हक जताने की बात कही. लेकिन डॉ त्रिपाठी उनकी ही बातों को आगे बढ़ाते हुए ‘साहित्यकार कल्याण कोष’ के गठन का प्रस्ताव रखा. कार्यक्रम में कई नई पुस्तकों के साथ कक्षा 8 की नवीनतम अंक का लोकार्पण भी किया गया तथा कोलकाता से प्रकाशित देश के लोकप्रिय पाक्षिक गंभीर समाचार का लोकार्पण भी पत्रिका की सहायक संपादक अपूर्व त्रिपाठी तथा अतिथियों के द्वारा किया गया ।
कार्यक्रम को दिल्ली से पधारीं शिक्षा निदेशक सुरजमणि स्टेला ने भी संबोधित किया तथा इसमें राज्य भर से साहित्यकार व साहित्यानुरागी मौजूद था.

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