रायपुर। भारतीय जनता पार्टी चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक एवं पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा ने स्वास्थ्य सचिव डॉ. आलोक शुक्ला द्वारा केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को वेंटीलेटर की खराबी को लेकर लिखे गए पत्र की भाषा पर आपत्ति करते हुए कहा है कि संघीय ढांचे का सम्मान करते हुए एक अधिकारी को अपने पत्र की भाषा संयमित रखनी चाहिए। डॉ. चोपड़ा ने कहा कि संविदा नियुक्ति के अधिकारी होने के कारण मर्यादाहीन भाषा का उपयोग कर डॉ. शुक्ला अपने नियुक्तिकर्ता आकाओं को खुश करने में लगे हैं ताकि उनका आशीर्वाद बना रहे।
भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक डॉ. चोपड़ा ने कहा कि लगभग वर्ष भर पूर्व मिले वेंटीलेटर को लेकर अब शिकायत करना छत्तीसगढ़ सरकार की लापरवाही को उजागर करता है। डॉ. चोपड़ा ने स्वास्थ्य सचिव डॉ. शुक्ला को पत्र लिखकर कहा है कि उन्हें यह भी खुलासा करना चाहिए कि भारत सरकार से यह वेंटीलेटर कब राज्य सरकार को प्राप्त हुए और प्रदेश में कब-कब कहां-कहां कितने वेंटीलेटर भेजे गए? डॉ. चोपड़ा ने अपने पत्र में सवाल किया कि प्रदेश सरकार की ओर से जिन-जिन स्थानों को वेंटीलेटर भेजे गए, क्या वहां इनको चलाने वाला दक्ष स्टाफ था? डॉ. शुक्ला यह भी बताएँ कि भेजे गये वेंटीलेटर कब पैकिंग से बाहर निकाले गए एवं किस दिनांक को उन्हें चालू किया गया और इनमें खराबी की सूचना कब-कब एवं कहां-कहां से मिली? डॉ. चोपड़ा ने यह भी जानना चाहा कि प्राप्त 320 में से 45 वेंटीलेटर में छोटी-मोटी खराबी थी या बड़ी, क्या इसका ब्योरा एकत्रित किया गया? चालू 275 वेंटिलेटर में कितने आज उपयोग में लाए जा रहे हैं? डॉ. चोपड़ा ने पूछा कि छत्तीसगढ़ सरकार के पास स्वयं के कितने वेंटीलेटर हैं एवं उनमें से कितने कार्य कर रहे हैं एवं कितने बेकार पड़े हैं?