छत्तीसगढ़ : रायपुर 09 फरवरी शनिवार को कबीर नगर के सेंट्रल इंजीनियरिंग एंड मैनेजमैंट कॉलेज में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट दीप्ति सिंह गौर ने विधि साक्षरता शिविर में कानून के बारे में आवश्यक जानकारी स्टूडेंट्स एवं कालोनी की महिलाओं को दी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हम एक आर्थिक और राजनीतिक शक्ति पुंज के रूप में उभर रहे हैं। हमारे संविधान ने हमें जो अधिकार और अवसर दिए हैं उन्हें भी प्रमुखता मिल रही है। आज महिलाएं भी मेहनत कर रही हैं और अपने कॅरियर को लेकर गंभीर हैं। ऐसे में महिलाओं को भारतीय कानून द्वारा दिए गए अधिकारों के प्रति जागरूक होनी चाहिए।
महिलाओं की सुरक्षा के लिये बने कानून के प्रति जागरूकता आवश्यक है। महिलाओं की सुरक्षा के लिये कड़ें कानून बनाये गये हैं किंतु इनकी जानकारी आम महिलाओं को नहीं होने के कारण वे कानून के लाभों से वंचित रह जाती हैं। महिलाओं के लिये बनाये गये कानून की जानकारी आम महिलाओं को भी होनी चाहिए। उक्त बातें ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट दीप्ति सिंह गौर ने शनिवार को विधि साक्षरता जागरूकता अभियान के तहत आयोजित महिला एवं स्टूडेंट्स विधि जागरूकता शिविर में कही। मजिस्ट्रेट साहिबा ने कहा कि महिलाओं के लिये कई कानून बनाये गये हैं तथा कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है, इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होना चाहिए तथा इन योजनाओं से महिलाओं को लाभ मिलना चाहिए। वहीं,कानून के संबंध में थाना प्रभारी कबीर नगर अमित तिवारी ने जानकारी देते हुये बताया कि सोशल मीडिया में किसी महिला से संबंधित अनर्गल खबरों को प्रकाशित करने पर महिला थाने में रिपोर्ट दर्ज करा सकती है। उन्होंने बताया कि महिलाओं के चरित्र पर विपरीत टिप्पणी करने पर सोशल मीडिया के ग्रुपों के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कराया जा सकता है। विधि सलाहकार के द्वारा मानहानि का दावा प्रस्तुत किया जा सकता है। उन्होने बताया कि प्रेस की एक आदर्ष आचरण संहिता है अगर प्रेस इस आदर्श आचरण संहिता के खिलाफ कार्य करता है तो उसके विरूद्ध पुलिस में प्रेस काउंसिल ऑफ इण्डिया एवं वकील के माध्यम से सक्षम न्यायालय परिवाद दायर किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि यौन दुर्व्यव्यवहार से पीड़ित महिला के नाम का खुलासा प्रेस एक्ट के तहत सोशल मीडिया अथवा प्रिंट मीडिया में नहीं किया जा सकता। महिला विधिक कानून साक्षरता शिविर में अपर मजिस्ट्रेट ने बताया कि यौन दुर्व्यव्यवहार से पीडि़त महिला थाने में लिखित अथवा मौखिक शिकायत दर्ज करा सकती है। उन्होने बताया कि सीआरपीसी की धारा 154 के तहत महिलाओं से दुर्व्यव्यवहार के प्रकरण दर्ज कराये जाते हैं। तिवारी ने बताया कि पीडि़त महिलाओं को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते समय जो सही तथ्य हैं वही तथ्य रखना चाहिए। इससे अपराधी को पकड़ने तथा अपराध के अनुसंधान करने में सहायता मिलती है तथा पुलिस की कार्यवाही सही दिशा में जाती है। उन्होने कहा कि झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने से पुलिस सही कार्यवाही नहीं कर पाती है। उन्होने बताया कि शिकायत करते समय शिकायतकर्ता अपना नाम, पता सही लिखायें साथ ही मोबाईल नम्बर भी लिखायें।
सेन्ट्रल इंजीनियरिंग एन्ड मैनेजमेंट कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ अजय तिवारी ने इस तरह के शिविर को एक सराहनीय कदम बताया और कहा कि ऐसे आयोजन सतत होते रहने से जागरूकता आएगी एवं क्राइम भी नियंत्रित होगा , अजय तिवारी ने सभी का आभार प्रकट कर प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया , सोशल कार्यकर्ता एवं स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार पंडित पी के तिवारी ने इस कार्यकृम की व्यवस्था की रूपरेखा स्वयं सम्हाल रखी थी,