एक्सक्लूसिव कवरेज….स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही..5 घंटे तक एंबुलेंस नही पहुंचने से कोरोना संक्रमित की मौत

Madhyapradesh

अरुण गुप्ता : सीधी : देश प्रदेश में तिब्र गति से कोरोना संक्रमण फैल रहा है और कोरोना संक्रमण से मौतों का भी सिलसिला थम नहीं रहा ऐसे में एक दिल दहला देने वाली बड़ी घटना निकल कर सामनेेे आ रही।

कोरोना संक्रमण को लेकर सीधी जिले का स्वास्थ्य विभाग अपने लापरवाही की सभी हदें पार कर चुका है और कल रात इसी का एक दिल दहला देने वाला परिणाम भी सामने देखने को मिला। रीवा के लिए रेफर होने के उपरांत 5 घंटे तक एंबुलेंस उपलब्ध ना हो पाने के कारण एक युवा व्यवसाई की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

एंबुलेंस की देरी से गई जान

सीधी जिले के स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कल खुलकर सामने आई और कोरोना संक्रमित मरीजों को लेकर जो आरोप जिले के स्वास्थ्य हमले पर लगाए जाते थे वो पूरी तरह सामने आ गए। जिस कोरोना संक्रमित एक मरीज को कल मंगलवार की शाम तकरीबन 6 बजे रीवा के लिए रेफर किया गया था उसके परिजनों को रात 11 बजे तक एंबुलेंस के इंतजार में अपने मरीज को तिल-तिल कर मरते हुए देखना पड़ा।

क्या है पूरा मामला

उल्लेखनीय है कि सीधी शहर के जिला न्यायालय के बगल में स्थित शॉपिंग कंपलेक्स में प्रेम स्वीट्स के बगल में एक कंप्यूटर की दुकानदार उन्हें 21 सितंबर को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर जिला अस्पताल परिसर के आइसोलेशन वार्ड में कल 22 सितंबर को सुबह 8 बजे भर्ती कराया गया था।

रीवा के लिए किया रेफर

कोरोना संक्रमित की तबीयत कल मंगलवार को अचानक ज्यादा खराब होने के कारण उन्हें शाम तकरीबन 6 बजे आइसोलेशन वार्ड के प्रभारी डॉ. जान ने रीवा के लिए रेफर कर दिया था।

5 घंटे तक हुआ एंबुलेंस का इंतजार

रीवा के लिए रेफर होने के उपरांत मरीज के परिजन बेसब्री के साथ एंबुलेंस का इंतजार करने लगे पर जिले की चिकित्सा सेवाओं का आलम यह रहा कि 5 घंटे बाद भी रात 11 बजे तक उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। इस दौरान लगातार कोरोना पेशेंट की तबीयत खराब होती चली गई और रात 11 के उपरांत जब एंबुलेंस वाहन आइसोलेशन सेंटर में पहुंचा तो आनन-फानन मरीज को उस में शिफ्ट किया जाने लगा।

स्वास्थ्य अमले ने पार की सारी हदें

इस दौरान एक बेहद शर्मनाक घटना यह भी घटी की आइसोलेशन वार्ड में उपस्थित स्वास्थ्य कर्मियों ने कोरोना पेशेंट के स्ट्रेचर को अपने स्वास्थ्य अमले द्वारा एंबुलेंस वाहन तक भेजने के बजाय मड़रिया स्कूल में शिक्षक उनके बड़े भाई नमीश प्रकाश श्रीवास्तव जो हैवी डायबिटिक हैं उन्हें बिना पीपीई किट पहनाए ही सिर्फ हैंड ग्लब्स पहनाकर उनसे स्ट्रेचर उठवाकर एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया।

परिजनों ने घर से बुलाया डॉक्टर को

इन सारी वेदनापूर्ण विषम परिस्थितियों को झेल रहे परिजनों ने अंततः फिर से आइसोलेशन वार्ड के प्रभारी डॉ. जान को उनके बंगले से विनती करके आइसोलेशन सेंटर में बुलवाया जिन्होंने वहां पहुंचते ही एंबुलेंस में शिफ्ट किए गए कोरोना पेशेंट को देखते ही मृत घोषित कर दिया।

अभी भी एंबुलेंस में रखा है शव

इस चिकित्सकीय लापरवाही से हुई मौत के उपरांत शव को एंबुलेंस में ही पीपीई किट बनाकर इस वक्त समाचार लिखे जाने तक अभी रखा गया है।

सुबह 9 बजे परिजनों को बुलाया

परिजनों ने “पत्रकार अरुण गुप्ता” को बताया कि उन्हें सुबह 9 बजे बुलाया गया है। डॉक्टरों ने कहा है कि 9 बजे जब प्रशासनिक अधिकारी एसडीएम आएंगे उसके बाद ही यह तय हो पाएगा कि कोरोना के शिकार हुए पेशेंट  के शव को उनके परिजनों को सौंपा जाएगा या उसका अंतिम संस्कार प्रशासनिक स्तर पर किया जावेगा।

इस मौत का जिम्मेदार कौन…

यहां ये खून खोला देने वाला बेहद गंभीर आरोप स्वास्थ्य विभाग पर है कि इस पूरे घटनाक्रम में 5 घंटे के विलंब से आई एंबुलेंस के लिए दोषी कौन है ।जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे लापरवाही को लेकर कोई जांच कमेटी बैठाएगी या दोषी पर सीधे सीधे कार्यवाही करेगी।

ऐसे दिल दहला देने वाली घटना को देखते हुए शासन प्रशासन भी आंख मूंदकर चुप है।

परिजनों ने ठहराया है स्वास्थ्य विभाग की घोर  लापरवाही

स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक लापरवाही की वजह से एक युवक की बेवजह जान जाना सीधी जिले के लोगों की भावनाओं को शर्मसार और दुखी करता है। इस संक्रमण के दौर में ऐसी घटनाएं जिले भर के लोगों में स्वास्थ्य विभाग की विश्वसनीयता को लेकर एक दहशत पैदा करती हैं।शासन को ऐसी लब्रवाही को अमले में अतिशीघ्र लेना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *