जगदलपुर। शहर के व्यस्ततम संजय मार्केट में खुले करंट के तार की चपेट में आने से डोसा सेंटर संचालक अंशुल कश्यप की मौके पर ही मौत हो गई। दर्दनाक हादसे ने बाजारों में बिजली व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलते हुए जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।जिस संजय मार्केट में रोजाना सैकड़ों लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं, वहां बिजली के तार खुले और खतरनाक स्थिति में कैसे पड़े रहे? क्या जिम्मेदार विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी, तो हादसे से पहले तारों को सुरक्षित क्यों नहीं किया गया?हादसे के बाद जागेगा सिस्टम या पहले से होगी जांच?अंशुल कश्यप की मौत के बाद अब सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि बाजार में बिजली सुरक्षा की पूरी व्यवस्था का है।

क्या शहर के अन्य बाजारों में भी ऐसे खुले और जोखिम भरे बिजली तार मौजूद हैं! क्या जिम्मेदार विभाग हादसे के बाद पूरे शहर में बिजली लाइनों की जांच कराएगा?सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जानलेवा स्थिति सामने आने के बाद कार्रवाई का इंतजार क्यों किया जाता है? क्या जिम्मेदार विभाग हादसे से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है?अंशुल कश्यप की मौत से एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया है, लेकिन यह हादसा शहर की बिजली व्यवस्था, सुरक्षा मानकों और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल छोड़ गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस हादसे के बाद क्या कार्रवाई करते हैं और क्या बाजारों में ऐसे खतरनाक बिजली तारों को हटाने के लिए कोई ठोस अभियान शुरू किया जाता है।