आधुनिक प्रबंधन से बढ़ेगा छत्तीसगढ़ में मछली उत्पादनकेज कल्चर और तालाबों में मछलियों की बीमारियों की त्वरित पहचान पर जोर

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रायपुर, 11 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के जलाशयों और जल संसाधनों में केज कल्चर (पिंजरा पालन) के जरिए मछली उत्पादन की अपार संभावनाओं को देखते हुए राज्य में मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसी कड़ी में मत्स्य पालन विभाग, छत्तीसगढ़ और आईसीएआर-सीआईएफआरआई, बैरकपुर (कोलकाता) के संयुक्त तत्वावधान में रायपुर स्थित मत्स्य पालन विभाग कार्यालय में दो दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।

sकार्यशाला का मुख्य उद्देश्य केज कल्चर और तालाबों में मछली पालन करने वाले किसानों को मछलियों में होने वाली बीमारियों की रियल-टाइम डायग्नोस्टिक्स, रोकथाम और वैज्ञानिक उपचार की आधुनिक तकनीकों की जानकारी देना रहा।वैज्ञानिकों ने बताए बीमारी की पहचान और उपचार के तरीकेकार्यशाला में आईसीएआर-सीआईएफआरआई के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा और सोहिनी चटर्जी ने किसानों और विभागीय अधिकारियों को तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने केज कल्चर और तालाबों में मछलियों में होने वाली विभिन्न बीमारियों के लक्षण, उनकी पहचान, रोकथाम और वैज्ञानिक उपचार के तरीकों को विस्तार से समझाया।

100 से अधिक मत्स्य पालकों ने लिया हिस्सादो दिवसीय कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से करीब 50-60 केज कल्चर किसान और 50-60 पारंपरिक तालाब मत्स्य पालक शामिल हुए। विभिन्न जिलों के मत्स्य अधिकारियों ने भी प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी की।फील्ड स्तर पर त्वरित जांच और डेटाबेस पर जोरकार्यशाला में राज्य में मत्स्य पालन के बेहतर प्रबंधन को लेकर भविष्य की रणनीतियों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने फील्ड लेवल पर जांच, खेत और जलस्रोत के स्तर पर ही मछलियों में होने वाली बीमारियों की त्वरित पहचान तथा समय पर उपचार की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।मैदानी कर्मचारियों को रोगों की रिपोर्टिंग के लिए प्रशिक्षित करने और भविष्य में बेहतर प्रबंधन के लिए जलाशयों एवं मछलियों के स्वास्थ्य से संबंधित रिकॉर्ड का डेटाबेस तैयार करने की दिशा में भी जानकारी दी गई।

एकीकृत प्रबंधन से उत्पादन बढ़ाने पर जोरकार्यक्रम में अतिथियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और एकीकृत प्रबंधन को बढ़ावा देना जरूरी है। इससे किसानों को मछलियों की बीमारियों की समय पर जानकारी मिलने के साथ उत्पादन में होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकेगा।कार्यक्रम में एन.एस. नाग, संचालक, मत्स्य पालन, छत्तीसगढ़; आनंद निषाद, अध्यक्ष, मछुआ कल्याण बोर्ड; डॉ. लखन लाल धीवर, उपाध्यक्ष, मछुआ कल्याण बोर्ड; सुश्री बीना गड़पाले, उप-संचालक, मत्स्य पालन प्रशिक्षण संस्थान; विकास कुमार साहू, सहायक मत्स्य अधिकारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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