बीमारी मंत्री में, इलाज PA का? भ्रष्टाचार छिपाने भाजपा सरकार में चल रहा बलि का बकरा ढूंढने का खेल : सुरेंद्र वर्मा

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रायपुर : 10सितंबर 2026। मंत्रियों द्वारा पिए बदलने के लगातार निकल रहे आदेशों को सरकार के भ्रष्टाचार छुपाने की कवायद बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों पर कार्रवाई करने से डर रहे हैं, इसलिए केवल निचले कर्मचारियों और पीए पर गाज गिराकर औपचारिकता पूरी की जा रही है। छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार में सुशासन नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार छिपाने का सर्कस चल रहा है। ‘बीमारी कहीं है और इलाज कहीं और ढूंढा जा रहा है।’ विभागों में हो रही भारी कमीशनखोरी और घोटालों के पाप से बचने के लिए भाजपा के मंत्री बार-बार अपने पीए (PA) बदल रहे हैं। अगर मंत्री ईमानदार हैं, तो फिर बार-बार पीए बदलने का यह नाटक क्यों? कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि पीए बदलने का छलावा बंद हो और सीधे नाकाम व भ्रष्ट मंत्रियों की जवाबदेही तय की जाए।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि उनके कैबिनेट के मंत्रियों को बार-बार अपने पीए (PA) बदलने की नौबत क्यों आ रही है!

क्या वे खुद स्वीकार कर रहे हैं कि उनके दफ्तरों में भ्रष्टाचार हो रहा था? क्या सिर्फ पीए को हटा देने से मंत्रियों के विभाग में हुए भ्रष्टाचार और घोटालों के पाप धुल जाएंगे? डिप्टी सीएम विजय शर्मा और अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और पर्यटन संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के पीए पर ठीकरा फोड़ने के मामले सर्वविदित हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार द्वारा अपनी प्रशासनिक नाकामियों और मंत्रियों के भ्रष्टाचार के पाप को छुपाने के लिए बार-बार मंत्रियों के पर्सनल असिस्टेंट बदले जा रहे हैं। भाजपा सरकार सुशासन का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि विभागों में भारी कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार जारी है।

जब मामले सार्वजनिक होने लगते हैं, तो मूल वजह विभागीय मंत्री पर कार्रवाई करने के बजाय केवल पीए बदलकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि बीमारी कहीं है और इलाज कहीं और ढूंढा जा रहा है। मंत्रियों का अपने विभाग और अमले पर कोई नियंत्रण नहीं है। नीतिगत कमियों और प्रशासनिक अक्षमता पर पर्देदारी करने का प्रयास किया जा रहा है। फाइलें रुकी हुई हैं, विकास कार्य ठप हैं, और पारदर्शी व्यवस्था बनाने के बजाय बलि का बकरा ढूंढने का खेल चल रहा है। मंत्रियों और अधिकारियों के इस भ्रष्टाचार-कमीशनखोरी के खेल से आम जनता पिसा रही है। सरकारी दफ्तरों में काम अटक रहे हैं, योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल रहा है।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पीए बदलना यह साबित करता है कि दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है। अगर मंत्री निर्दाेष हैं तो बार-बार पीए क्यों बदले जा रहे हैं? यह प्रशासनिक फेरबदल नहीं, भ्रष्टाचार के सबूत मिटाने और अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश है। दोष मंत्रियों के नीयत में है, और बलि पीए की ली जा रही है।

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