जगदलपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘अटल आरोग्य लैब’ का दायरा जिला अस्पतालों से बढ़ाकर अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सिविल अस्पतालों तक विस्तारित कर दिया है। इस पहल से अब ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को पैथोलॉजी जांच के लिए जिला मुख्यालय या निजी लैब के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।राज्य शासन ने जांच सुविधाओं को त्वरित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए केस सूचना डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली लागू की है। इसके तहत भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम एचएलएल लाइफ केयर लिमिटेड को तकनीकी सहयोग और संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाओं ने व्यवस्था की निगरानी के लिए महेंद्र पांडे को जिला नोडल अधिकारी (लैब) नियुक्त किया है।हाल ही में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बकावंड और बस्तर का निरीक्षण किया गया। बकावंड में लैब पूरी तरह तैयार मिली, जहां सीबीसी, यूरिन एनालाइजर और फुली ऑटोमेटिक बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर स्थापित किए जा चुके हैं। गुणवत्ता परीक्षण के बाद सीबीसी जांच भी शुरू कर दी गई है। जिन जटिल जांचों की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं है, उनके सैंपल सुरक्षित तरीके से जिला अस्पताल भेजे जा रहे हैं।वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बस्तर में लैब स्थापना के लिए स्थान का चयन पूरा हो चुका है। यहां भी जल्द अत्याधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी। फिलहाल वहां से ब्लड सैंपल जांच के लिए जिला अस्पताल भेजे जा रहे हैं।स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को उनके नजदीकी सरकारी अस्पताल में ही समय पर और गुणवत्तापूर्ण पैथोलॉजी जांच उपलब्ध कराना है। उपकरणों की स्थापना, संचालन और गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि मरीजों को बेहतर और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।