AI और सैटेलाइट से होगी फसलों की चौबीसों घंटे निगरानी, समय रहते मिलेगी खतरे की चेतावनी; लक्ष्मी वर्मा का सवाल पर केंद्र ने संसद में बताई बड़ी योजना

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नई दिल्ली। किसानों को फसल नुकसान से बचाने और कृषि को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट निगरानी और मशीन लर्निंग की मदद से फसलों पर मंडरा रहे खतरे का पहले ही पता लगाया जाएगा। संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने बताया कि सरकार ऐसी आधुनिक प्रणालियों का उपयोग कर रही है, जिससे सूखा, बाढ़, खराब मौसम और कीटों के हमले की समय रहते चेतावनी मिल सके।सांसद ने सरकार से पूछा था कि क्या फसल हानि को रोकने के लिए उपग्रह निगरानी और एआई आधारित विश्लेषण प्रणाली लागू करने की कोई योजना है और क्या इसे छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा।

इसके जवाब में कृषि राज्य मंत्री ने बताया कि कृषि निर्णय सहायता प्रणाली (Decision Support System-DSS) पहले से ही छत्तीसगढ़ सहित देश के सभी राज्यों में काम कर रही है। यह प्रणाली उपग्रह चित्रों, मौसम, मिट्टी, फसल, जलाशयों और भूजल से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर लगभग वास्तविक समय (Near Real Time) में सूखा, बाढ़ और प्रतिकूल मौसम की निगरानी करती है। इसके आधार पर किसानों को समय रहते फसल प्रबंधन की सलाह दी जाती है, जिससे नुकसान कम किया जा सके।मंत्री ने बताया कि सरकार ने राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (National Pest Surveillance System-NPSS) भी शुरू की है।

यह एआई और मशीन लर्निंग पर आधारित प्लेटफॉर्म है, जो किसानों को खेत में लगने वाले कीटों की पहचान, उनकी निगरानी और नियंत्रण के लिए विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराता है। यह प्रणाली एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) को बढ़ावा देती है और पहले जैविक एवं जैव नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह देती है। रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग की सिफारिश केवल आवश्यकता पड़ने पर और निर्धारित मात्रा में ही की जाती है।सरकार ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) के तहत किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम से होने वाले नुकसान पर वित्तीय सुरक्षा दी जा रही है। इन योजनाओं में बुआई से लेकर कटाई के बाद तक की फसल हानि को कवर किया जाता है।इसके अलावा, खरीफ 2023 से येस-टेक (YES-TECH) प्रणाली लागू की गई है, जिसमें उपग्रह इमेजरी और रिमोट सेंसिंग तकनीक के जरिए फसल उत्पादन का आकलन किया जाता है। हालांकि, छत्तीसगढ़ ने अभी तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत YES-TECH को लागू नहीं किया है।कृषि राज्य मंत्री ने यह भी बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) किसानों के लिए एआई आधारित मानसून और मौसम सलाह जारी कर रहा है। स्थान-विशिष्ट मौसम पूर्वानुमानों के आधार पर दी जाने वाली यह सलाह अब तक करीब 5.28 करोड़ किसानों तक पहुंच चुकी है और किसानों को समय पर बुआई, सिंचाई तथा अन्य कृषि कार्यों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल रही है।

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