नई दिल्ली। NEET-UG 2026 परीक्षा विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। इस्तीफे के साथ जारी अपने खुले पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा विवाद, शिक्षा सुधारों और युवाओं के भविष्य पर अपनी बात रखी। वहीं पत्रकारों के संगठन CJP के प्रमुख अभिजीत दीपके और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इस घटनाक्रम पर महत्वपूर्ण बयान दिए हैं।धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में कहा कि NEET-UG 2026 परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल सीबीआई जांच के आदेश दिए, परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित कराई और भविष्य में परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों के हितों की रक्षा करना और निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करना थी। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।प्रधान ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने छात्रों को भ्रमित कर आंदोलन को भटकाने का प्रयास किया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे राजनीतिक विवादों से दूर रहकर अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान केंद्रित करें। साथ ही प्रधानमंत्री, मंत्रालय के अधिकारियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
इस घटनाक्रम के बाद CJP (Council of Journalists Protection) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “वे कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।” उन्होंने इसे संगठित संघर्ष और जनदबाव की ताकत बताते हुए कहा कि जब सत्ता जवाबदेही से बचने की कोशिश करती है, तब लोकतांत्रिक संघर्ष उसे निर्णय बदलने पर मजबूर कर देता है।
उनके इस बयान के बाद पत्रकार संगठनों और सामाजिक संगठनों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद जारी वीडियो संदेश में कहा कि उनका उद्देश्य केवल किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं था, बल्कि छात्रों के साथ न्याय, परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार सुनिश्चित करना था। उन्होंने बताया कि उन्होंने 26 दिन का अनशन सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद समाप्त किया। उनके अनुसार सरकार ने परीक्षा प्रणाली पर संसद में चर्चा, आंदोलनरत छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने और विभिन्न मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है।सोनम वांगचुक ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता आंदोलन कर रहे छात्रों की सुरक्षा थी। उन्होंने आशंका जताई कि यदि आंदोलन हिंसक होता तो छात्रों पर बल प्रयोग या कानूनी कार्रवाई हो सकती थी। इसलिए उन्होंने लगातार शांतिपूर्ण आंदोलन पर जोर दिया और प्रदर्शनकारियों से हिंसा से दूर रहने की अपील की।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और उसके बाद सामने आए इन बयानों ने NEET विवाद को एक नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम दे दिया है। आने वाले दिनों में परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।