विधायक कॉलोनी के लिए नकटी गांव पर चला बुलडोजर, 80 घर जमींदोज; बरसात में बेघर हुए परिवार, सियासत भी गरमाई

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रायपुर : राजधानी रायपुर के माना थाना क्षेत्र स्थित नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए प्रशासन ने सोमवार की सबेरे सबेरे बिलजी काट कर प्रशासन और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बड़ी बुलडोजर कार्रवाई की। करीब 40-45 वर्षों से बसे लगभग 80 घरों को ध्वस्त कर दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत बने 32 पक्के मकान भी शामिल हैं। कार्रवाई के दौरान महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की आंखों के सामने उनके आशियाने मलबे में तब्दील हो गए। लोगों की प्रशासन से गुहार बेअसर रही और विरोध के बीच पुलिस व ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की और हंगामे की स्थिति बनी रही।

प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और उन्हें नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में बसाया जाएगा।

“बरसात तक कार्रवाई नहीं होगी” का दावा टूटा?

ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई से महज दो दिन पहले रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि बरसात तक कोई तोड़फोड़ नहीं होगी। इसके बावजूद अचानक बुलडोजर चलने से लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

ग्रामीणों का दर्द: “हम 45 साल से यहीं रह रहे थे, अब कहां जाएं?”

ग्रामीणों का कहना है कि वे चार से पांच दशक से इस जमीन पर रह रहे हैं। उनका सवाल है कि जब सरकार के पास पर्याप्त जमीन है तो विधायक कॉलोनी के लिए इसी बस्ती को क्यों चुना गया? यदि हटाना ही था तो पहले वैकल्पिक आवास और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? अब बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और पूरे परिवार का भविष्य संकट में है।

टी.एस. सिंहदेव ने जताया विरोध

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि बरसात से पहले नकटी गांव के लोगों को बेघर करना बेहद अमानवीय है।

रात 11:30 बजे पहुंचे विकास उपाध्याय, बोले- ‘दिल दहला देने वाला मंजर’

पूर्व विधायक विकास उपाध्याय देर रात नकटी गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वहां का दृश्य बेहद पीड़ादायक था। कई परिवार खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर थे। कोई पेड़ के नीचे सो रहा था तो कोई अपने टूटे घर के मलबे के पास बैठकर रो रहा था। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग पूरी तरह असहाय नजर आए।

उन्होंने दावा किया कि प्रभावित लोगों ने बताया कि आधी रात बिजली काटकर बुलडोजर चलाया गया। पुनर्वास के दावों के विपरीत कई परिवारों को केवल एक कमरे का आवास मिला है, जहां बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।

सरकार से सवाल

विकास उपाध्याय ने सरकार से सवाल किया कि जब लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं, तब क्षेत्र के जनप्रतिनिधि कहां हैं! उन्होंने मांग की कि सभी प्रभावित परिवारों को तत्काल सम्मानजनक पुनर्वास, बिजली, पानी, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा मानवीय आधार पर उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।

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