बिलासपुर : कोरबा जिले के डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।मामले की सुनवाई जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच में हुई।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले की गंभीरता, आवेदक की भूमिका और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि आर्थिक अपराध गंभीर प्रकृति के होते हैं, जिन्हें सोच-समझकर निजी लाभ के लिए अंजाम दिया जाता है। ऐसे अपराधों से न केवल जनता का भरोसा टूटता है, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचता है।
मामले के मुख्य बिंदु :-
जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू और एसीबी ने कोरबा जिले में DMF फंड के दुरुपयोग के मामले में 23 फरवरी 2026 को अनिल टुटेजा को गिरफ्तार किया था। उस समय वे उद्योग विभाग में अतिरिक्त सचिव के पद पर पदस्थ थे।
जांच के दौरान सामने आया कि सह-आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा को फर्मों से करीब 16 करोड़ रुपये अवैध कमीशन के रूप में प्राप्त हुए, जिसमें से राशि का हिस्सा टुटेजा को भी दिए जाने के संकेत मिले हैं।
पैरिटी का तर्क खारिज :-
आवेदक ने यह दलील दी थी कि अन्य सह-आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, इसलिए उन्हें भी समान आधार पर राहत दी जाए। हालांकि कोर्ट ने कहा कि अन्य आरोपी लंबे समय तक जेल में रहे हैं, जबकि टुटेजा केवल करीब दो महीने से ही हिरासत में हैं। ऐसे में पैरिटी का लाभ नहीं दिया जा सकता।
जांच प्रभावित होने की आशंका :-
कोर्ट ने यह भी माना कि आवेदक वरिष्ठ पद पर रह चुका है और रिहा होने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है या साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है। इसलिए उसकी कस्टडी जांच के लिए आवश्यक है।
ट्रायल में देरी नहीं बना आधार :-
टुटेजा की ओर से ट्रायल में संभावित देरी को भी जमानत का आधार बताया गया, जिसे कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि केवल देरी जमानत का पर्याप्त आधार नहीं हो सकती।इस तरह हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अनिल टुटेजा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।