रायपुर। छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को नई गति देने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल का दायरा बढ़ाते हुए अब इसे “छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल” के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद विधानसभा ने अधिनियम-1972 में संशोधन को स्वीकृति दे दी है। राजपत्र में प्रकाशन के बाद यह संशोधित अधिनियम प्रभावी होगा।वर्ष 2004 में स्थापित गृह निर्माण मण्डल अब तक 1 लाख से अधिक आवासों का निर्माण कर चुका है, जिनमें 70 प्रतिशत से अधिक मकान कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के लिए हैं। नए संशोधन के बाद मण्डल न सिर्फ किफायती आवास उपलब्ध कराएगा, बल्कि अधोसंरचना विकास के बड़े प्रोजेक्ट्स में भी सक्रिय भूमिका निभाएगा।आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि इस संशोधन के तहत मण्डल अब स्व-वित्तीय आधार पर सड़क, पुल, राजमार्ग, हवाई अड्डे, जलप्रदाय और माल परिवहन जैसी परियोजनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वयन कर सकेगा। साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), पुनर्विकास, नगर विकास योजनाएं और मिश्रित भूमि उपयोग जैसी परियोजनाओं को भी गति मिलेगी।उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2024-25 के तृतीय अनुपूरक बजट में 735 करोड़ रुपये का ऋण चुकाकर मण्डल को ऋणमुक्त किया गया है, जिससे इसकी वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।मण्डल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने बताया कि वर्तमान में प्रदेशभर में 3050 करोड़ रुपये की 78 आवासीय परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिनमें से 56 योजनाएं आवास मेला 2025 में शुरू की गई थीं। वहीं ओटीएस योजना के तहत 221.21 करोड़ रुपये की 1447 संपत्तियों का विक्रय किया गया है। 650 करोड़ रुपये से अधिक की 6 रिडेवलपमेंट परियोजनाएं भी तैयार हैं, जिनमें अब तेजी आने की उम्मीद है।आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने कहा कि मण्डल के पास अनुभवी तकनीकी स्टाफ उपलब्ध है, जो नई भूमिका में उच्च गुणवत्ता के साथ निर्माण एवं विकास कार्यों को अंजाम देगा। मण्डल अब शहरी-ग्रामीण अधोसंरचना, स्लम पुनर्विकास और अन्य सरकारी परियोजनाओं को भी प्रभावी ढंग से लागू करेगा।इस बदलाव के साथ छत्तीसगढ़ में सुनियोजित शहरी विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और अधोसंरचना निर्माण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।