बस्तर संभाग बंद पूरी तरह सफल, विशाल रैली के साथ कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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बस्तर : 10 दिसंबर 2025। बस्तर संभाग पूरी तरह से बंद वी सफल, विशाल रैली के साथ कलेक्टर को एक जुटता दिखाते हुए सौंपा ज्ञापन ।
दिवंगत आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की जेल अभिरक्षा में हुई संदिग्ध मृत्यु को लेकर सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। इसी मुद्दे पर आज बस्तर संभाग में सर्व आदिवासी समाज, ओबीसी समाज, गोंडवाना समाज समन्वय समिति सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने बस्तर बंद का आह्वान किया, जिसे व्यापक जनसमर्थन मिला। सुबह से ही बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर और सुकमा जिलों में बाजार बंद रहे, व्यापार पूरी तरह प्रभावित रहा और परिवहन सेवाओं पर भी असर दिखाई दिया। इसके बावजूद पूरा बंद पूर्णतः शांतिपूर्ण रहा, जिसे समाज ने “न्याय की मांग में जनता की एकजुटता” बताया बस्तर चैंबर ऑफ कॉमर्स, लघु व्यापारियों, ऑटो-टैक्सी यूनियनों और विभिन्न समाज प्रमुखों ने भी इस बंद का समर्थन किया। क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई, और समुदाय ने शांतिपूर्ण ढंग से अपने विरोध की अभिव्यक्ति की।

बंद के बाद विशाल रैली, कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

प्रमुख सवाल इस प्रकार हैं—

  1. फर्जी पट्टों की कहानी षड्यंत्र है वन अधिकार मान्यता पत्र (IFR) केवल जिला स्तरीय समिति द्वारा जारी होते हैं। यदि दस्तावेज फर्जी थे, तो क्या वे कलेक्टर कार्यालय से जारी हुए ।तहसीलदार द्वारा सील-मोहर के साथ ऋण पुस्तिका जारी करने के पीछे किसकी अनुमति थी ।बिना DLC के वन अधिकार पत्र जारी हुए ऋण पुस्तिका और फिर लैंप्स संस्था से ऋण स्वीकृत कैसे हुआ ।यह पूरी शृंखला प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत का संकेत देती है।
  2. जेल अभिरक्षा में संदिग्ध मृत्यु—कई सवाल अनुत्तरित
  • कई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई गई

ज्ञापन में जिन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं, वे हैं थाना प्रभारी चारामा — तेज कुमार वर्मा, नायब तहसीलदार चारामा — कृष्णा पाटले, जेल अधीक्षक जिला जेल कांकेर वी. रेनु ध्रुव, जेल अधीक्षक केंद्रीय जेल रायपुर योगेश कुमार क्षत्री
इन पर आरोप है कि उन्होंने जानकारी छुपाई, नियमों का उल्लंघन किया, और मृत्यु को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती।

भूमाफिया और राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप

दिवंगत जीवन ठाकुर भूमि माफियाओं और राजनीतिक प्रभावशाली लोगों के अवैध कब्जों के खिलाफ लगातार आवाज उठाते थे। समाज का कहना है कि वे कई उच्च-स्तरीय लोगों के भ्रष्टाचार को उजागर कर रहे थे। उन्हें फर्जी मामलों में फँसा कर जेल भेजा गया। उनकी मृत्यु राजनीतिक-प्रशासनिक षड्यंत्र का परिणाम प्रतीत होती है।

समाज की मांगें — न्यायिक जांच आयोग गठन से लेकर मुआवजा तक

सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग ने अपनी मांगों में निम्न बिंदु प्रमुखता से रखे फर्जी पट्टे और आरोपों की जांच, वन अधिकार पट्टों की पूरी प्रक्रिया की जिला स्तर पर निष्पक्ष जांच।फर्जी दस्तावेज प्रक्रिया में शामिल सभी अधिकारियों/कर्मचारियों पर FIR।दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी तहसीलदार/पटवारी/सचिव को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई। जेल अभिरक्षा में मृत्यु की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय न्यायिक/मजिस्ट्रियल जांच आयोग ।आरोपित सभी अधिकारियों को तत्काल बर्खास्त कर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा एवं एक सदस्य को सरकारी नौकरी। सभी दस्तावेज—पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, जेल डायरी, स्थानांतरण आदेश—परिवार को उपलब्ध कराए जाएं। भविष्य में कैदी की बीमारी, स्थानांतरण, अस्पताल ले जाने या मृत्यु की सूचना तत्काल परिवार को देने का नियम लागू हो। मानवाधिकार आयोग की निगरानी में जांच। इस प्रकरण को हाई-प्रोफाइल हत्या मानते हुए FIR दर्ज हो। चालान पेश करने के नाम पर रिश्वत मांगने वाले पुलिस कर्मियों को निलंबित किया जाए।

समाज का चेतावनी—न्याय न मिला तो उग्र आंदोलन

ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि सरकार त्वरित कार्यवाही नहीं करती तो समाज व्यापक और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। इसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।

अपर कलेक्टर ने ज्ञापन प्राप्त कर शासन को भेजने का आश्वासन दिया

कलेक्टर बस्तर ने समाज के प्रतिनिधियों से ज्ञापन प्राप्त किया और कहा कि सभी बिंदुओं को शासन स्तर पर भेजा जाएगा तथा उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जस्टिस के लिए बस्तर की एकजुटता — बंद से रैली तक दिखा आदिवासी समाज का मजबूत संदेश

आज बस्तर संभाग में जिस शांति और सामूहिक तरीके से बंद का पालन हुआ और जिस बड़े पैमाने पर जनता रैली में उतरी, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि—दिवंगत जीवन ठाकुर के लिए न्याय की आवाज अब एक जन आंदोलन बन चुकी है।”समाज ने साफ कहा कि—न्याय मिलेगा, तभी बस्तर शांत रहेगा।”यह शांतिपूर्ण बंद और विशाल रैली बस्तर संभाग में आदिवासी समाज की एकता और न्याय के लिए संघर्ष का सशक्त उदाहरण बन गई है।गंगा नाग, हिडमो मंडावी,पप्पू नाग,संतु मौर्य, सोनधर नाग, बसंत कश्यप, अमृत कश्यप,भोला बघेल, बनंसिह मौर्य, सुखदेव, बामदेव भारती, फुल सिंग नाग, लक्ष्मण बघेल, लखेश्वर कश्यप , अशोक नेताम, लक्ष्मी मांझी, अनिल बघेल, श्याम लाल नाग, माखनलाल शोरी, कमलेश,पुरन कश्यप, गोवर्धन बघेल, सूमित पोयाम, शोभा वेको, रामधर एवं अन्य उपस्थित थे।

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