महासमुंद/बागबाहरा। छत्तीसगढ़ के ‘धान का कटोरा’ में आज एक किसान का खून सिस्टम के मुंह पर तमाचा बनकर छिटका है। सरकारी दावों की गुलाबी फाइलों और वातानुकूलित कमरों में बैठे अफसरों के आंकड़ों के बीच जमीनी हकीकत इतनी भयावह है कि एक कागज के ‘टोकन’ की कीमत किसान की ‘जिंदगी’ से बड़ी हो गई है।
विकासखंड बागबाहरा के ग्राम पंचायत बोडरीदादर (सेनभांठा) में जो हुआ, वह आत्महत्या का प्रयास नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था द्वारा की गई मानसिक हत्या की कोशिश है।
सब्र का बांध टूटा, तो बह निकला खून :ग्राम बोडरीदादर निवासी किसान मनबोध गाड़ा आज जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। उसका गुनाह सिर्फ इतना था कि उसने अपनी मेहनत की फसल बेचने के लिए खेमड़ा धान समिति केंद्र से ‘टोकन’ मांग लिया।
हफ्तों से चक्कर काटते किसान को कभी “सर्वर डाउन”, कभी “समय समाप्त”, तो कभी “कल आना” जैसे रटे-रटाए बहाने परोसे गए। कर्ज लेकर फसल उगाने वाला किसान जब अपनी ही उपज बेचने के लिए भिखारी बना दिया गया, तो उसकी मानसिक स्थिति जवाब दे गई। हताशा के चरम पर पहुंचकर उसने ब्लेड से अपना गला रेत लिया।
कागजों में ‘किसान हितैषी’, जमीन पर ‘किसान बेबस’ :यह घटना खेमड़ा धान उपार्जन केंद्र (सहकारिता बैंक मुंगासेर) के माथे पर कलंक है।
112 की सायरन और अस्पताल में कराहता किसान :खून से लथपथ मनबोध को देख ग्रामीणों के होश उड़ गए। डायल 112 की मदद से उसे आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा ले जाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, गले पर गहरा घाव है और अत्यधिक खून बह चुका था। स्थिति बेहद नाजुक है बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि मनबोध पिछले तीन दिनों से अपनी धान बेचने के लिए टोकन लेने की कोशिश में चॉइस सेंटर जा रहा था। किसान के पास 1 एकड़ और 40 डेसिमल खेती की ज़मीन है। टोकन न मिलने से परेशान होकर उसने यह कदम उठाया। किसान की हालत गंभीर है और उसे रायपुर ट्रांसफर करने की तैयारी की जा रही है।