रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ब्रिटिश नागरिक की संदिग्ध मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था, पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक डॉ. कृष्ण कुमार, उम्र 80 वर्ष, ब्रिटेन सरकार में लंबे समय तक डॉक्टर सेवाएँ देने के बाद रिटायर हुए थे। पिछले दिनों वे रायपुर के पचपेड़ी नाका चौक स्थित एक निजी अस्पताल में इलाजरत थे। भोपाल में उनकी अचानक तबीयत बिगड़ी और बिना किसी परिजनों दिए एक महिला उन्हें रायपुर लाकर निजी हॉस्पिटल में एडमिट करा दी और आखिर दिन तक किसी को सूचना नहीं दी। इस बीच संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसके बाद से परिवारजन सदमे और आक्रोश में हैं।

वहीं, आज बुधवार को दिल्ली से रायपुर पहुँचे स्वर्गीय डॉ. कृष्ण कुमार के परिवारजनों ने न्यू राजेंद्र नगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इसमें परिवार ने मौत को संदिग्ध बताया और पोस्टमार्टम की मांग की, ताकि असल सच्चाई सामने आ सके। लेकिन पूरा दिन बीत जाने के बाद भी न तो पुलिस ने कार्रवाई की, न ही अस्पताल प्रबंधन ने कोई स्पष्ट जवाब दिया।
परिवार का सबसे बड़ा आरोप अस्पताल और पुलिस प्रशासन पर है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल ने न केवल मौत की सूचना समय रहते नहीं दी, बल्कि एम्बेसी और नज़दीकी परिजनों को भी जानकारी देने में लापरवाही की। चिंता का विषय यह है कि एक विदेशी नागरिक की मृत्यु पर वह प्राथमिक औपचारिकताएँ तक नहीं निभाई गईं, जिनकी आवश्यकता कानून के तहत अनिवार्य है।
परिवार के अनुसार, निजी अस्पताल का व्यवहार संदिग्ध रहा। परिवार ने सवाल उठाया कि अस्पताल ने मौत की सूचना गोपनीय क्यों रखी? क्या अस्पताल किसी तिथि, दस्तावेज़ या मेडिकल रिपोर्ट को छिपाने की कोशिश कर रहा है? यही वजह है कि पोस्टमार्टम की मांग लगातार की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौत प्राकृतिक है या इसमें कोई लापरवाही या मेडिकल negligence शामिल है।
उधर, न्यू राजेंद्र नगर थाना प्रभारी अविनाश सिंह पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। परिवारजनों का आरोप है कि थाना प्रभारी ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। उन्हें आशंका है कि पुलिस अस्पताल प्रबंधन का पक्ष लेकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। परिजनों ने कहा कि थाना प्रभारी लगातार अस्पताल के कथनों को आगे बढ़ाते रहे और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से बचते रहे।
परिवार पूरे दिन रायपुर में न्याय की उम्मीद लेकर भटकता रहा, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। परिजनों ने कहा कि पुलिस की अनसुनी और प्रशासन की उदासीनता ने उनके भरोसे को तोड़ दिया है। मृतक विदेशी नागरिक थे, इस नाते एम्बेसी की सूचना देना पुलिस और अस्पताल दोनों की जिम्मेदारी थी, लेकिन समय पर यह जानकारी साझा नहीं की गई।
यह मामला न केवल एक मौत का मामला है, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता, जवाबदेही और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
मृतक के परिवार का कहना है कि वे मौत की सच्चाई जानना चाहते हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि पोस्टमार्टम ही एकमात्र रास्ता है, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि मृत्यु सामान्य थी या किसी प्रकार की लापरवाही या संदिग्ध परिस्थिति से हुई है। परिजन मांग कर रहे हैं कि मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो। परिवार ने प्रशासन से गुहार लगाई कि विदेशी नागरिक की मौत को हल्के में न लिया जाए और सभी कानूनी प्रक्रिया का तत्काल पालन किया जाए। उनका कहना है कि न्याय पाने के लिए हम यहाँ–वहाँ भटक रहे हैं, लेकिन सिस्टम के किसी भी हिस्से में संवेदनशीलता दिखाई नहीं दे रही। रायपुर के इस पूरे घटनाक्रम ने शहर के पुलिस प्रशासन और निजी अस्पतालों की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं, पारदर्शी जांच प्रक्रिया और एक विदेशी नागरिक की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर गंभीर बहस की मांग करती है। परिजनों की पीड़ा और आक्रोश जारी है, और वे न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने की बात कह रहे हैं। उसके बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।