रायपुर : छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने आज रायपुर में प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) कार्यालय द्वारा आयोजित ऑडिट पखवाड़ा के तहत राज्य सरकार के बजट नियंत्रण अधिकारियों (BCOs), कोषागार अधिकारियों और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDOs) के लिए एक कार्यशाला का उद्घाटन किया । यह कार्यशाला भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा 20 नवंबर से 9 दिसंबर, 2025 तक आयोजित किए जा रहे ‘ऑडिट दिवस’ कार्यक्रम का एक हिस्सा है । इस आयोजन का उद्देश्य सार्वजनिक प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को मजबूत करने में ऑडिट की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करना है ।
अपने संबोधन में, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि 2004 से 2014 के बीच देश में नीतिगत पंगुता का दौर था, और भारतीय अर्थव्यवस्था डाँवाडोल थी तथा गंभीर वित्तीय संकट में थी । उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद चीजें बदल गईं । त्वरित सुधारों की शुरुआत ने देश की गिरती अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित किया है, और एक समय की कमजोर अर्थव्यवस्था अब सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गई है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत बहुत जल्द तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, और यह पहले ही हम पर शासन करने वाले ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ चुका है । वित्त मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि GST से पहले की कर व्यवस्था में भारत के विभिन्न राज्यों में कई कर दरें थीं, जिससे व्यावसायिक प्रतिष्ठान निवेश करने से डरते थे । उन्होंने कहा कि 2017 में जीएसटी लागू होने से कर प्रणाली में सुधार हुआ, जिसने पूरे भारत में एक समान कर लागू किया, जिससे निवेशकों और व्यावसायिक समुदाय के बीच आत्मविश्वास बढ़ा । मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि कैग की भूमिका अब केवल व्यय के निरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि परिणाम-आधारित सुशासन पर ध्यान केंद्रित करते हुए शासन की योजनाओं के वास्तविक परिणामों और प्रभावों के मूल्यांकन तक विस्तृत हो गई है ।
इस अवसर पर, प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), यशवंत कुमार, ने छत्तीसगढ़ के वित्तीय प्रशासन में पारदर्शिता, सुशासन और जवाबदेही को बढ़ाने के लिए वित्त विभाग और AG कार्यालय के बीच घनिष्ठ सहयोग पर जोर दिया । उन्होंने उल्लेख किया कि एजी कार्यालय ने मासिक सिविल खाता संकलन को अगले माह की 25 तारीख से घटाकर 10 तारीख तक करने जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं, और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के GPF भुगतानों को समय पर सुनिश्चित किया है । उन्होंने ई-कुबेर, पीएफएमस और ऑनलाइन जीपीएफ प्राधिकरण जैसी डिजिटल प्रणालियों के उपयोग की सराहना की, जिसने लेखांकन और ऑडिट प्रक्रियाओं को अधिक सक्षम और रियल-टाइम आधारित बना दिया है । कुमार ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे सामूहिक प्रयासों से छत्तीसगढ़ को वित्तीय अनुशासन और सुशासन का एक आदर्श राज्य बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ ।
इस कार्यक्रम में वित्त विभाग, छत्तीसगढ़ शासन की विशेष सचिव शीतल शाश्वत वर्मा और निदेशक पेंशन एवं कोषागार, छत्तीसगढ़ शासन पद्मिनी भोई साहू, के साथ-साथ प्रधान महालेखाकार (PAG) रायपुर कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के अन्य विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित थे।