संजीव कटियार रिटायर्ड हो गए लेकिन कुर्सी का मोह बरकरार

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में रिटायरमेंट के बाद किसी भी अधिकारी और कर्मचारी को किसी भी विभाग या आयोग में संविदा नियुक्ति देने का प्रचनल जारी है । छत्तीसगढ़ राज्य बिजली उत्पादन कंपनी में प्रबंध संचालक की हैसियत से कार्यरत संजीव कटियार की सेवाओं में चार महीना और बड़ा दी गई है। अब कटियार प्रबंध संचालक की हैसियत से काम करते रहेंगे। सूत्रों के मुताबिक इस फैसले से कर्मचारियों और अधिकारियों में दबी हुई नाराजगी है,लेकिन खुलकर सामने नहीं आ रही। सरकार ने रिटायर्ड का उम्र तय कर दिया है फिर भी रिटायर्ड के बाद कुछ चुनिंदा लोगों को संविदा नियुक्ति में रख लिया जाता है। ऐसे में पिछले कर्मचारियों पर सवाल उठता है कि क्या वही रिटायर्ड कर्मचारी अधिकारी काबिल हैं,क्या सरकार के पास कोई लायक अधिकारी /कर्मचारी नहीं है। क्या संजीव कटियार जैसा अधिकारी राज्य सरकार के पास नहीं है।

आखिर संजीव कटियार ने क्या किया है जो उन्हें वापस 4 महीने और सेवा देना पड़ रहा है या संजीव कटियार को कुर्सी का मोह है! रिटायर होने के बाद भी दफ्तर और कुर्सी से दूरी नहीं बना पाए। सेवानिवृत हो चुके आरके श्रीवास, राजेश वर्मा और श्रीधर के अलावा कोरबा वेस्ट के हसदेव थर्मल पावर में पदस्थ रहे संजय शर्मा भी दौड़ में शामिल थे, लेकिन संजीव कटियार ने सबको पीछे कर दिया।

संजीव कटियार 30 सितम्बर 2024 को सेवानिवृत हो गए थे , लेकिन सेवानिवृति से पहले सरकार ने जब उन्हें बिजली उत्पादन कंपनी में बतौर प्रबंध संचालक नियुक्त किया था तब आदेश में यह साफ लिखा था कि वे 30 नवम्बर 2024 तक बने रहेंगे।

इधर प्रबंध संचालक का कार्यकाल समाप्त होने से एक दिन पहले राज्य शासन ने 29 नवम्बर 2024 को छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड के मेमोरेण्डम आफ एसोसियशन एण्ड आर्टिकल आफ एसोसियशन के अंर्तनियम की कंडिका-77 सहपठित कंडिका-78 में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए उन्हें फिर से संचालक और प्रबंध संचालक के पद पर पदस्थ कर दिया है.

संजीव कटियार की नियुक्ति पर सवाल खड़ा हो रहा है । संजीव कटियार पर विशेष मेहरबानी क्यों की गई ! प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा कायम है कि अडानी की कंपनी का कोयला जनरेशन कंपनी के जरिए ही खपाया जाता है इसलिए उनकी ताजपोशी संभव हो पाई है।

वैसे अब से कुछ अरसा पहले तक बिजली उत्पादन कंपनी में प्रबंध संचालक बनने के लिए बकायदा विज्ञापन निकाला जाता था। योग्यता और क्षमता का निरीक्षण करने के उपरांत सलेक्शन होता था, लेकिन इधर कुछ सालों से यह लगने लगा कि इस पद को भरने में राजनीतिक और गुणवत्ता विहीन बिजली सामानों की सप्लाई करने रसूखदार सप्लायरों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

सूत्र तो यह बताते हैं कि विवादों और फर्जीवाड़े में घिरी टेक्नीकल टूल्स, हेम्स कार्पोरेशन, सुमित ट्रेडिंग, यूनिक सप्लाई, अमार इंटरप्राइजेस, राहुल इंटरप्राइजेस, एसडी इंस्ट्रडी, तनु ट्रेडिंग और कलकता की मां संतोषी इंडस्ट्रियल कार्पोरेशन सहित कई कंपनियों के कर्ताधर्ता सप्लायर कटियार की दोबारा ताजपोशी के लिए जबरदस्त ढंग से सक्रिय थे. फिलहाल कटियार चार महीने के लिए प्रबंध संचालक बन गए हैं. कहा जा रहा है कि सरकार उन्हें मार्च के बाद फिर से मौका नहीं देनी वाली है. अगर मौका देना होता तो पूरे एक साल तक के लिए उनकी सेवाओं में बढ़ोतरी की जाती.

कई योग्य लोग रह गए पीछे

बताया जाता है कि प्रबंध संचालक बनने की दौड़ में सबसे प्रमुख नाम एसके बंजारा का था, लेकिन उन्हें बड़ी चालाकी से पीछे धकेल दिया गया. बंजारा अटल बिहारी ताप बिजली संयंत्र में बतौर कार्यपालक निदेशक की हैसियत से पदस्थ थे और सीनियर भी थे.लेकिन उनके कार्य करने की शैली को आधार बनाकर उन्हें ट्रेनिंग सेल कोरबा में पदस्थ कर दिया गया। प्रबंध संचालक के लिए एनटीपीसी में पदस्थ रहे प्रकाश तिवारी का नाम भी चल रहा था। सेवानिवृत हो चुके आरके श्रीवास, राजेश वर्मा और श्रीधर के अलावा कोरबा वेस्ट के हसदेव थर्मल पावर में पदस्थ रहे संजय शर्मा भी दौड़ में शामिल थे, लेकिन सब पीछे रह गए।

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