जशपुर : छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के पत्थलगांव स्थित इंदिरा गांधी शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। स्कूल परिसर में छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम की सैकड़ों पुस्तकें जलाकर राख कर दी गईं। सूत्रों के मुताबिक ये वही पुस्तकें थीं जिन्हें राज्य सरकार हर वर्ष लाखों विद्यार्थियों तक निःशुल्क पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है।सूत्रों के अनुसार, इस गंभीर प्रकरण में विद्यालय की प्राचार्या के.के. इन्दवार, व्याख्याता गुलाब भगत और बुक बैंक प्रभारी नीलम तिर्की विद्यालय में हैं।

सूत्रों ने तो यह भी बताया कि इन पुस्तकों को नियमानुसार विद्यार्थियों को वितरित करने के बजाय जलाया गया, जिससे स्टॉक में की गई अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार के साक्ष्य मिटाए जा सकें। यह घटना केवल लापरवाही नहीं,

बल्कि सुनियोजित षड्यंत्र की आशंका को जन्म देती है।छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के दिशा-निर्देशों के अनुसार, अप्रयुक्त या शेष बची पुस्तकें निगम को वापस की जानी चाहिए अथवा उचित रिकॉर्ड के साथ सुरक्षित रखी जाती हैं, लेकिन यहां तो जला दिया गया,आखिर किसके आदेश से पुस्तक जलाया गया है ,जबकि तो पुस्तकें जलाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसके बावजूद विद्यालय परिसर में सरकारी किताबों को आग के हवाले किया जाना नियमों की खुली अवहेलना और सरकारी संसाधनों के साथ घोर खिलवाड़ है।

यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है—क्या ये पुस्तकें विद्यार्थियों को कभी वितरित ही नहीं की गई थीं !, क्या इनका वितरण फर्जी रूप से दर्शाकर हेराफेरी की गई! या फिर इन्हें निजी लाभ के लिए बेचकर, बाद में साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से जलाया गया ! यह संदेह अब पुख्ता हो चला है कि स्कूल स्तर पर लंबे समय से गड़बड़ियों का खेल चल रहा था, जिसे अब आग में छुपाने की कोशिश की जा रही है।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इस गंभीर और जनहित से जुड़ी घटना के बावजूद, न तो अब तक किसी अधिकारी पर ठोस कार्रवाई हुई है, न ही पुलिस या शिक्षा विभाग की ओर से कोई प्राथमिकी दर्ज की गई है। पूरा प्रशासनिक तंत्र या तो मौन है, या मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है।

यह सब देखकर स्थानीय, आमजनता, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों में गहरा रोष है। वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। दोषियों के तत्काल निलंबन और बर्खास्तगी की मांग के साथ-साथ, जिले के अन्य विद्यालयों में भी पुस्तक वितरण और बुक बैंक की स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग जोर पकड़ रही है।
यह मामला अब सिर्फ किताबों के जलने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार, जनधन की बर्बादी और शासन की जवाबदेही का मुद्दा बन चुका है। शासन-प्रशासन को इस मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए