स्वास्थ्य विभाग में सीटों के कारण चिकित्साको की कमी… सीटों पर स्वास्थ्य विभाग लापरवाह

Chhattisgarh

रायपुर : छ ग में पीजी डॉक्टरों की सीट बढ़ती नहीं दिख रही है। जिसके चलते चिकित्सकों की कमी है। 20 वर्षों के बाद भी पीजी सीटें मात्रा रायपुर व बिलासपुर में है। बिलासपुर में पीजी की सीट सिर्फ  नान क्लीनिकल ब्रांच में है, जो की ना के बराबर है और रायपुर में क्लीनिकल व नान क्लीनिकल दोनों में है। सीएससी में डॉ कि कमी हो रही है। परन्तु छत्तीसगढ़ राज्य बनने के 15 साल बाद भी पीजी की सीट मात्र रायपुर व बिलासपुर में ही है उनमें भी कई ऐसे विभाग है जिनमे पीजी की सीटें 10-15 सालों से प्रस्तावित है जो इस गति में कम होता रहा है।

शासन स्तर पर संवेदन हीनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रायपुर मेडिकल में मेडिसिन के कुछ वर्षो पूर्व जो सीटें बढाई गई थी वो अब कटने की कगार पर है पर इस सम्बन्ध में तो कालेज प्रशासन न DME और ना स्वयं सरकार चिंतित नजर आ रही है।

राज्य के एक मात्र सुपर स्पेसिलिस्ट अस्पताल DKS में भी अब तक पूर्ण अधीक्षक की न्युक्ति नहीं हो पाई है और वहां का काम भी आम सरकारी रवैया यानी प्रभार कद के अनुसार DME को ही अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

गुप्त सूत्रों से पता चला है कि छत्तीसगढ़ ही एक मात्र ऐसा राज्य है, जहां  ग्रामीण क्षेत्र में प्राथमिक हेल्थ सेंटर में एक एमबीबीएस डॉ पदस्थ रहता था। डॉ. कि कमी के कारण समुदायिक  स्वस्थ केंद्र में पोस्टिंग होती जिनको  स्थानांतरित कर पद स्थापना को समुदायिक स्वास्थ्य  केंद्र में  दिया जाता है और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सिर्फ RMA में  भरोसे छोड़ दिया गया है। इस तरह से ग्रामीण  व शहरी क्षेत्रों में डॉ. कि कमी के कारण स्वास्थ्य ब्यवस्था लचर पड़ी हुई है। जिसके चलते आए दिन छत्तीसगढ़ वादियों को चाहे ग्रामीण या शहरिय क्षेत्र वासियों  हो ,  को स्वास्थ्य विभाग के लापरवाही के कारण आए दिन भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।यह  स्वास्थ्य विभाग लापरवाह कही जा सकती है।

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