युक्तियुक्तकरण नहीं, ये तो ‘युक्तिहीन तमाशा’ है साहब !  धरमजयगढ़ में क्या नियम चलते हैं

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रायगढ़। जिले के विकासखंड धरमजयगढ़ में शिक्षा विभाग या सर्कस का रंगमंच। धरमजयगढ़ के मासूम स्कूलों में आजकल ‘शिक्षा’ नहीं, ‘शिकार’ होता है। यहाँ अगर आप कला विषय के जूनियर शिक्षक हैं, तो आप ‘विशेष बचे हुए’ हैं।

बाकियों का क्या:-
उनका नाम हो चाहे अगनेयुस कुजूर हो या कांती बाई, अगर वो सीनियर हों, तो भी ‘अतिशेष’ घोषित किए जाएंगे, क्योंकि धरमजयगढ़ में वरिष्ठता नहीं, सिफ़ारिश चलती है।

केस-1: गनपतपुर — जहां ‘हिन्दी’ को हटा कर ‘कला’ का किला बचाया गया

प्रकरण:

प्रधान पाठक: अगापित मिंज (कला) अतिशेष संरक्षण
शिक्षक: राजू बेक (कला) – जूनियर
अगनेयुस कुजूर (हिन्दी) – विषय में अकेला, फिर भी अतिशेष, अब आप सोचिए,जब एक विषय (कला) में दो शिक्षक और एक प्रधान पाठक, फिर भी हिन्दी वाले को हटाया गया। ‘अगनेयुस’ हिन्दी का शिक्षक था।

केस-2: ससकोबा — तीन कला शिक्षक, और हटे वो जिसकी तारीख नियुक्ति सबसे पहले!

स्थिति: प्रधान पाठक — बचे! (चलो ठीक है)
कांती बाई – नियुक्त: 10.10.2009
मंजू रानी – नियुक्त: 01.07.2011 (जूनियर) लेकिन क्या हुआ! कांती बाई को हटा दिया गया, और रानी जी को बचा लिया गया।

शिक्षा के नाम पर मज़ाक :

अगनेयुस हटे, क्योंकि वो शायद नियम को सीरियसली लेते थे। राजू बेक बचे।कांती बाई हटीं।

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