सुप्रीम कोर्ट वक्फ एक्ट पर बड़ी खबर, नए वक्फ संशोधन कानून पर फिलहाल अमल नहीं 

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New Delhi : 18अप्रैल2025,सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए वक्फ संशोधन अधिनियम (Waqf Amendment Act) पर बड़ी रोक लगाई है. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दाखिल करने के लिए 7 दिन का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक काउंसिल या बोर्ड के तहत सेक्शन 9 में कोई नई नियुक्ति नहीं होगी.कोई वक्फ संपत्ति चाहे वह रजिस्ट्रेशन से हो या सरकारी अधिसूचना से डिनोटिफाई नहीं की जाएगी.

सिर्फ 5 याचिकाओं पर सुनवाई होगी, बाकी को आवेदन मानकर विचार किया जाएगा.केंद्र को 7 दिन में जवाब देना है, याचिकाकर्ताओं को उसके बाद 5 दिन में जवाब दाखिल करना होगा.

सरकार को साफ निर्देश – कोई वक्फ या यूजर द्वारा घोषित वक्फ संपत्ति डिनोटिफाई नहीं की जाएगी.

यह आदेश देशभर की वक्फ संपत्तियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है. अगली सुनवाई की तारीख तय की जानी बाकी है.

केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विवादास्पद वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के कुछ प्रमुख प्रावधानों पर फिलहाल कार्रवाई नहीं की जाएगी, जिसमें केंद्रीय वक्फ परिषद और वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों को शामिल करना और अदालतों द्वारा वक्फ घोषित संपत्तियों को गैर-अधिसूचित करने के प्रावधान शामिल हैं.भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार  तथा न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने इस संबंध में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा दिए गए आश्वासन को दर्ज किया.

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, “सुनवाई के दौरान एसजी मेहता ने कहा कि प्रतिवादी 7 दिनों के भीतर संक्षिप्त जवाब दाखिल करना चाहेंगे और आश्वासन दिया कि अगली तारीख तक 2025 अधिनियम के तहत बोर्ड और परिषदों में कोई नियुक्ति नहीं होगी. उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अधिसूचना या राजपत्रित द्वारा पहले से घोषित उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ सहित वक्फ की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.”

न्यायालय ने अधिनियम के प्रावधानों पर रोक लगाने की प्रार्थना पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए सरकार को सात दिन का समय दिया. न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता इसके बाद पांच दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं.अंतरिम प्रार्थना पर निर्णय लेने के लिए मामले की सुनवाई 5 मई को फिर से होगी.

पीठ ने स्पष्ट किया कि “अगली तारीख पर सुनवाई केवल निर्देशों और अंतरिम आदेशों के लिए होगी, यदि कोई हो.”

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