नई दिल्ली : 17अप्रैल2025,‘उर्दू विदेशी भाषा नहीं, इसी धरती पर पैदा हुई’,”उर्दू को लेकर “Supreme Court” की अहम टिप्पणी” यह हम नहीं कह रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि उर्दू विदेशी भाषा नहीं है, बल्कि भारत में जन्मी हुई भाषा है.सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी को हिंदुओं और उर्दू को मुसलमानों से जोड़ने के लिए औपनिवेशिक ताक़तों को दोषी ठहराया. साथ ही कहा कि उर्दू गंगा-जमुनी तहजीब या हिंदुस्तानी तहजीब का बेहतरीन नमूना है.महाराष्ट्र के अकोला ज़िले के पातुर नगर परिषद भवन के साइनबोर्ड पर उर्दू के इस्तेमाल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. पातुर कस्बे की ही पूर्व पार्षद वर्षताई संजय बागड़े ने इसके लिए याचिका दायर की थी.
याचिका में दावा किया कि महाराष्ट्र लोकल ऑथोरिटी (राजभाषा) एक्ट, 2022 के तहत उर्दू का इस्तेमाल अस्वीकार्य है. मांग की गई कि साइनबोर्ड में सिर्फ़ मराठी का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए. लेकिन कोर्ट ने इस विचार से असहमति जताई.
जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की दो जजों की बेंच 15 अप्रैल को मामले की सुनवाई कर रही थी. बेंच ने साइनबोर्ड पर उर्दू के इस्तेमाल को बरकरार रखा. साथ ही कहा कि संविधान के तहत उर्दू और मराठी को समान दर्जा हासिल है.