केन्द्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने बिलासपुर जिला अस्पताल जन औषधि केंद्र का किया निरीक्षण और हितग्राहियों से किया संवाद

Chhattisgarh

बिलासपुर, 07 मार्च, 2025,सातवीं जन‌ औषधि केन्द्र दिवस के अवसर पर केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री  तोखन साहू ने बिलासपुर जिला अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया । इस कार्यक्रम में बिलासपुर की महापौर पुजा विधानी, जिला अध्यक्ष, दीपक सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष, श्री अरूण सिंह, पुर्व महापौर किशोर राय सहित जिला चिकित्सालय के अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित उपस्थित थे ।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने स्वास्थ्य सेवा को किफायती और सुलभ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है । उन्‍होंने जन औषधि केंद्रों को ‘मोदी जी की दवाई की दुकान’ के रूप में संबोधित किया, जोकि देश के कोने-कोने में आम जनता को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराकर उनके लिए संजीवनी का काम कर रही हैं ।

उन्‍होंने बताया कि बिलासपुर जिले में कुल 18 जन औषधि केन्द्र अवस्थित हैं जिसमें से बिलासपुर नगर में 12 जन औषधीय केन्द्र हैं । अब तक बिलासपुर के लगभग 12 लाख लोग इस योजना से लाभान्वित हो चुकें हैं । साहू ने बताया कि वर्ष 2022-23 में जन औषधीय केन्द्र सिम्स को राज्य के सर्वश्रेष्ठ जन औषधीय केन्द्र का खिताब मिल चुका है ।

उल्‍लेखनीय है कि आज देशभर में 10,000 से अधिक जन औषधि केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं और इन केंद्रों से मिलने वाली गुणवत्तापूर्ण एवं सस्ती दवाएं बाजार दर से 50% से 90% तक कम कीमत पर उपलब्ध होती हैं । यह न केवल मरीजों के लिए एक वरदान साबित हुआ है, बल्कि यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में भी एक मजबूत कदम है । सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक इन केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 25,000 करना है।

इस अवसर पर साहू ने बताया कि वर्ष 2014 से पहले पूरे देश में केवल 7 एम्स (AIIMS) थे । ये संस्थान स्वास्थ्य सेवाओं में अग्रणी थे, लेकिन पूरे देश की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ये संख्या बहुत कम थी । वर्ष 2014 के बाद, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 16 नए एम्स स्थापित किए गए हैं, अब देश में कुल 23 एम्स स्‍थापति हो चुके हैं । उन्‍होंने बताया कि ये नए एम्स विभिन्न राज्यों में खोले गए हैं, जिससे चिकित्सा सुविधाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहकर दूर-दराज के क्षेत्रों तक भी पहुंच सकें।

साहू ने मेडिकल शिक्षा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश में मेडिकल छात्रों के लिए केवल 51,000 सीटें उपलब्ध थीं । मेडिकल सीटों की कमी के कारण लाखों युवाओं के डॉक्टर बनने का सपना पूरा नहीं कर पाता था । लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, मेडिकल सीटों की संख्या आज, दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 1,08,000 से अधिक हो चुकी हैं । एमबीबीएस ही नहीं, बल्कि पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल सीटों की संख्‍या में भी 110% की वृद्धि की गई है।

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