रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, प्रदेश में राज्य सरकार ने पिछले साढे 3 सालों में कोई भी डेवलपमेंट का काम नहीं किया है। सिर्फ केंद्र सरकार के पैसे से प्रदेश में काम हो रहा है। चाहे सड़क की योजना हो, आवास की योजना हो या मनरेगा की। इन कामों में जो राशि का उपयोग हो रहा है वो केंद्र की है। राज्य सरकार के पास कुछ करने के लिए नहीं है। नामकरण करने के अलावा भूपेश बघेल ने कुछ किया नहीं।
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा, प्रधानमंत्री की फ्लैगशिप स्कीम जिन्हें आकांक्षी जिले कहा जाता है वह ट्राईबल क्षेत्र बस्तर सहित राज्य के दस जिले शामिल है। वहां पर विशेष कार्ययोजना बनाकर वहां के विकास के कार्य किए जाने थे। विशेष तौर पर स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता पर केंद्र सरकार विशेष सहयोग दे रहा है। राजनांदगांव में इसकी समीक्षा करने ज्याेतिरादित्य सिधिंया आए थे। समीक्षा मे उन्होंने पाया कि कुपोषण और शिशु मृत्युदर बढ़ा हुआ है। वहां राज्य में 12 लाख आवास का आबंटन केंद्र सरकार ने किया था उसे राज्य सरकार ने वापस कर दिया है। ऐसा करने से छत्तीसगढ़ इस मामले में पूरे देश में पीछे हो गया है। अन्य केंद्रीय मंत्री भी आकांक्षी जिलों में चल रहे कार्यों को देखने अलग-अलग जगहों पर गए हैं।
राज्य के बजट में 52 प्रतिशत हिस्सा केंद्र
मुख्यमंत्री के द्वारा केंद्र सरकार पर राज्य का हिस्सा नहीं देने के आरोप पर डॉ. रमन ने कहा, केंद्र सरकार ने राज्य को मिलने वाली अनुदान की राशि को 32 से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया है। राज्य के बजट का विश्लेषण किया जाए तो उसमें शामिल योजनाओं में से 52 प्रतिशत हिस्सा केंद्र से मिलने वाली राशि का है। राज्य का हिस्सा केवल 48 प्रतिशत है। वह भी ऐसे कार्याें में खर्च हो रहा है जो उपयोगी नहीं है।
कोयला उत्पादन बढ़ाने मदद करनी चाहिए
उन्होंने छत्तीसगढ़ में कोयले की कमी को लेकर सीएम भूपेश बघेल के आरोपों पर कहा, आज छत्तीसगढ़ से आधे हिन्दुस्तान में कोयला जा रहा है। प्रदेश में कोयले की कोई कमी नहीं है। कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य को केंद्र की मदद करनी चाहिए।
बचने के सौ बहाने
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सीएम भूपेश को खुले मंच पर बहस करने की खुली चुनौती दी थी. जिस पर सीएम भूपेश ने ज्योतिरादित्य को दलबदलू कहकर विषय पर बात करने से इनकार किया। इस पर रमन सिंह ने कहा, सवाल पार्टी बदलने का नहीं था। मुद्दा ये है कि क्या सीएम खुले मंच पर बहस करेंगे? अगर वो भागना चाहते हैं बचना चाहते हैं तो उनकी मर्जी। सीएम के पास बचने के सौ बहाने हैं।