जशपुर के कांग्रेस सम्मेलन को लेकर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सिंहदेव ने कहा- प्रदेश की राजनीति का सबसे काला अध्याय, लोकतंत्र की ढिंढोरची अपने राष्ट्रीय पदाधिकारी के सामने पार्टी के भीतर के लोकतंत्र का चीरहरण कर रहे!

Chhattisgarh

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंहदेव ने कांग्रेस और प्रदेश सरकार में चल रही अंतर्कलह के अब सार्वजनिक और हिंसक हो जाने को प्रदेश की राजनीति का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा है कि लोकतंत्र की ढिंढोरची कांग्रेस में अब आलम यह है कि एक खेमा दूसरे खेमे की बात तक सुनने को तैयार नहीं है और अपने ही राष्ट्रीय पदाधिकारी के सामने पार्टी के भीतर के लोकतंत्र का चीरहरण करके अपने असली राजनीतिक चरित्र का शर्मनाक प्रदर्शन करने पर उतारू हैं।  सिंहदेव ने कहा कि अपने भारी बहुमत के अहंकार, सत्तालोलुपता और अंतर्कलह का बोझ ढोती कांग्रेस का कथित अंदरूनी लोकतंत्र दम तोड़ रहा है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता  सिंहदेव ने जशपुर के कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन में पूर्व कांग्रेस ज़िला अध्यक्ष और माध्यमिक शिक्षा मंडल के सदस्य के संबोधन के ऐन बीच में जाकर माइक छीने जाने और उनके साथ धक्कामुक्की किए जाने के मामले को लेकर कहा कि कांग्रेस का सत्ता-संघर्ष अब जिस मुक़ाम पर जाता नज़र आ रहा है, वह न केवल प्रदेश के राजनीतिक सौहार्द्र को ख़त्म करने वाला है, अपितु प्रदेश की राजनीति को गैंगवार की शक़्ल भी देने वाला है। प्रदेश में एक तो क़ानून-व्यवस्था का यूँ ही सत्यानाश हुआ पड़ा है, अब सत्तारूढ़ दल का यह क़ोहराम प्रदेश के भविष्य को अँधी गली में धकेल देगा। सिंहदेव ने कहा कि सम्मेलन में राष्ट्रीय पदाधिकारी के सामने कांग्रेस के लोग जिस तरह का शर्मनाक नज़ारा पेश कर रहे हैं, अनुमान लगाया जा सकता है कि बाकी समय कांग्रेस के लोग आपस में क्या करते होंगे?  सिंहदेव ने कहा कि ढाई-ढाई साल के मसले पर कोई ठोस निर्णय न सुनाकर प्रदेश को राजनीतिक अस्थिरता के भँवर में धकेलने के लिए कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व अपनी दुविधाग्रस्त मानसिकता का ही परिचय दे रहा है और छत्तीसगढ़ में विपक्ष के साथ-साथ अब कांग्रेस के एक खेमे के लोग भी राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हो रहे हैं।  सिंहदेव ने आशंका जताई कि यदि कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने ढाई-ढाई साल के मसले पर ठोस निर्णय तत्काल नहीं लिया तो प्रदेश का सत्तारूढ़ दल एक ओर खेमों में बँटकर गैंगवार के हालात पैदा कर देगा, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक अस्थिरता के मौक़े का फ़ायदा उठाकर नौकरशाही मनमानी पर उतर आएगी और पहले से ही ठप पड़ प्रदेश का विकास पूरी तरह ठप पड़ जाएगा।

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