गरियाबंद में कृषि विभाग की बंदरबांट का मामला सामने आया

Chhattisgarh

गरियाबंध : गरियाबंद में कृषि विभाग की बंदरबांट का मामला सामने आया है। विभाग ने अपने चहते ठेकेदारो को लाभ पहुंचाने के लिए मनमानी रकम खर्च कर दी मगर उसके बावजूद भी हितग्राहियों को योजना का लाभ नही मिल पाया।

कृषि विभाग ने कमार जनजाति के बहारुराम पीड़ित किसान ने जानकारी देते हुए कहा जैसे 27 गांव के 47 किसानों को 2019 में सौर सुजला योजना का लाभ देने का दावा किया है। मगर जब सूचना के अधिकार में जानकारी सामने आयी तो उसे देखकर हितग्राहियों के भी होश उड़ गए। कृषि विभाग से प्राप्त दस्तावेजों में बहारुराम का दो बार 304 फीट बोर खनन हुआ है और 95 फीट केसिंग डाली गई है, दस्तावेजों में बोर चालू होने का भी दावा किया गया है। यही नही विभाग ने बाकायदा बोर से 2160 गैलन पानी डिस्चार्ज होना भी बताया है। विभाग ने बहारुराम के बोर में कुल 94329 रुपये खर्च होना बताया। मगर जब बहारुराम ने असलियत बताई तो सच्चाई कुछ ओर ही निकलकर सामने आयी।

कृषि विभाग की मनमानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने परियोजना के पदाधिकारी को भी नही बख्शा। पीलूराम सोरी ने जब अपने बोर के बिल देखे तो वह भी चकित रह गया।

-कृषि विभाग को आदिवासी विकास परियोजना मद से 2019 में सौर सुजला योजना के तहत 55 लाख रुपये प्राप्त हुए थे। विभाग ने इस मद से 27 गांव के 47 कमार किसानों को बोर की सुविधा देने का दावा किया है। जिसमे विभाग ने जमकर बंदरबांट की है। विभाग ने एक तो बिना टेंडर ज्यादा रेट पर बोर उत्खनन कराए दूसरा बोर को कम खुदाई और ज्यादा गहरा दर्शाकर बिल बढ़ाकर निकाल दिए। ताजा हालात ये है कि अधिंकाश बोर बंद पड़े है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि अब जांच की मांग कर रहे है।

सच्चाई सामने आने के बाद अब कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कुछ बोलने की स्थिति में नही है। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि मामले की जांच होगी या फिर इस मामले की फाइल भी दूसरे मामलों की फाइलों की तरह कही धूल खाती नजर आएगी।

दीपक मंडावी, जनपद सदस्य,पीलूराम सोरी, सदस्य, आदिवासी कमार परियोजना ने जानकारी दी।

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