पारस राठौर : मंदसौर। सामाजिक कार्यकर्ता सुनील बंसल ने एक वक्तव्य में कहा कि 52 करोड़ की चम्बल योजना अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों की मिली भगत से भ्रष्टाचार की भेंट हो गई है। इतनी बड़ी धनराशि का 25 फीसदी भी शिंवना नदी पर खर्च किए जाते तो शिवना ही इतनी समर्थवान हो जाती कि हमें चम्बल को देखने की जरूरत ही नहीं होती।
बंसल ने कहा कि शिवना नदी पर ही अलग-अलग स्टॉप डेम बना दिए जाते यह बनाते निश्चित रूप से 25% लागत में यह काम हो जाता और मंदसौर की जनता भी प्यासी नहीं रहती काला भाटा की तरह ही चम्बल योजना भी फेल हो गई है। जो पाइप लाइन डाली है वह बहुत ही छोटी है अतः उक्त योजना को बनाने के पहले नर्मदा से जो कच्छ भुज के लिए लाइन गुजरात सरकार ने डाली थी उसका सर्वे देखना था उसकी डिजाइनिंग देखनी थी उसके बाद ही योजना को अमल में लाना था।
बंसल ने आरोप लगाया कि जिम्मेदारों को मालूम था कि यह योजना सफल नहीं होगी किंतु कमीशन के चक्कर में जनता की गाड़ी कमाई को लुटा दिया गया है जनता जाए भाड़ में उन्हें क्या पड़ी।
बंसल ने राज्य सरकार से मांग की ही कि इस योजना के क्रियान्वयन की पूरी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें चाहे वे कितने भी बड़े अधिकारी या नेता क्यों ना हो।