पिछले वर्ष के अमानक व सड़ चुके धान का उठाव करने के लिए मिलरों को बाध्य करना सरकार की नाक़ाबिलियत का शर्मनाक पहलू : भाजपा

Chhattisgarh

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, व विधायक शिवरतन शर्मा, नारायण चंदेल, डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, डमरूधर पुजारी, राजिंदर पाल भाटिया, संतोष उपाधयाय ने कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को पिछले वर्ष के ख़रीदे गए धान का उठाव करने जारी डीओ से उत्पन्न एक नए विवाद पर प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा है। भाजपा नेताओं ने कहा कि धान ख़रीदी के नाम पर नित-नए राजनीतिक षड्यंत्रों के ताना-बाना बुनने में लगी प्रदेश सरकार की नाक़ाबिलियत का यह शर्मनाक पहलू है।

भाजपा नेताओं ने कहा कि विधानसभा में सरकार सड़ जाने के कारण 4 लाख मीट्रिक टन धान के उठाव न होने की स्वीकृति कर चुकी है। जिम्मेदार यह बताएं कि इस धान का डीओ क्यों नहीं जारी किया गया। जबकि उस समय राइस मिलरों ने अधिकारियों पर पैसा मांगने का आरोप लगाया था। सरकार जवाब दे कि क्या लेनदेन न होने के कारण समय पर धान की मिलिंग नहीं हो पाई। भाजपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार विधानसभा में चार लाख मीट्रिक टन धान का उठाव न होने की गलत बयानी कर रही है। वास्तव में लगभग 6 लाख मीट्रिक टन चावल विभिन्न धान संग्रहण केन्द्रों में सड़ गये हैं।
यह काम प्रदेश सरकार को महीनों पहले कर लेना था, पर तब सियासी लफ़्फ़ाजियों में मशगूल सरकार कुंभकर्ण की नींद सो रही थी और अब बहानेबाजी करके इस वर्ष की धान ख़रीदी के काम को प्रभावित कर किसानों के साथ अन्याय कर रही है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रदेश के दुर्ग, महासमुंद, मुंगेली, जांजगीर-चाँपा ज़िलों के मिलर्स ने कस्टम मिलिंग के लिए धान यह कहकर उठाने से इंकार कर दिया है कि प्रदेश सरकार उन पर अब पिछले वर्ष का धान उठाव करने के लिए दबाव बना रही है और पुराने धान का डीओ काट रही है जबकि अब अमानक और सड़ चुके उस पुराने धान की मिलिंग संभव नहीं है।
भाजपा नेताओं ने मार्कफेड की दी जा रही दलील को लचर बताते हुए कहा कि कस्टम मिलिंग का पिछले साल का काम अब तक बाकी रहना सरकार की अपनी विफलता है । जिसके लिए अब इस साल की धान ख़रीदी के बीच मिलर्स को बाध्य करना ग़ैरवाज़िब है। प्रदेश सरकार को समय रहते इस पर ध्यान देकर काम कराना था जो वह कर नहीं पाई और इसी के चलते वह एफसीआई में तीन-तीन बार मोहलत लेने के बाद भी अपने हिस्से का लाखो मीटरिक टन चावल अब तक जमा नहीं कर पाई है और इसके लिए अब वह केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ प्रलाप कर रही है।

भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भी इस बात के लिए तंज कसा कि पिछले वर्ष कस्टम मिलिंग नहीं करा पाने के लिए कोरोना और लॉकडाउन की आड़ लेने का शर्मनाक उपक्रम कर रहे हैं, जबकि लॉकडाउन के बाद प्रदेश सरकार चाहती तो मई और जून माह में पिछले वर्ष की कस्टम मिलिंग का काम कराके इस वर्ष के लिए धान संग्रहण केंद्रों में ज़गह बना सकती थी ताकि ख़रीदी केंद्रों में आज धान के जमाव की नौबत नहीं । शराब की कोचियागिरी और दलाली के लिए प्रदेश सरकार की जैसी छटपटाहट कोरोना संक्रमण काल और लॉकडाउन में नज़र आई और तमाम वर्जनाओं की धज्जियाँ उड़ाकर प्रदेश सरकार शराब की नदियाँ बहाने, जश्न मनाने में मशगूल रही, वैसी छटपटाहट वह 13 सौ करोड़ रुपए मूल्य के चार लाख मीटरिक टन से ज़्यादा धान को सड़ने से बचाने और उसकी कस्टम मिलिंग के लिए दिखाती तो राष्ट्रीय संपदा की इतनी बड़ी क्षति नहीं होती।
भाजपा नेताओं ने कहा राष्ट्रीय सम्पदा की इस क्षति के लिए दोषी तमाम लोगों पर एफआईआर की मांग की है। प्रदेश सरकार के नाकारापन के चलते आज किसान अपनी उपज बेचने से वंचित होने के कग़ार पर खड़ा है और प्रदेश सरकार आँकड़ों का मायाजाल फैलाकर किसानों को भ्रमित कर रही है। प्रदेश सरकार के इसी झूठे सियासी चरित्र को बेनक़ाब करने और किसानों को पूरा न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध होकर भाजपा सड़क की लड़ाई लड़ने जा रही है और प्रदेश सरकार इससे घबराई और बौखलाई नज़र आ रही है। प्रदेश सरकार के इशारों पर मार्कफेड जिस तरह वर्ष 2020-21 के लिए हुए अनुबंध और प्रतिभूतियों को वर्ष 2019-20 में हस्तांतरित शर्तों के विरुद्ध जाकर मिलर्स को बाध्य करने से बाज आए। प्रदेशभर के ज़िलों में धान संग्रहण केंद्रों में पिछले वर्ष के 4,15,657 मीटरिक टन धान के उठाव और मिलिंग के लिए शेष मात्रा का ज़िलेवार आँकड़ा प्रस्तुत करते हुए भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि प्रदेश सरकार किसानों के साथ जो छल-कपट कर रही है और सत्ता के बल पर मिलर्स पर अपने नाकारापन का ठीकरा फोड़ने पर उतारू है, उसका माक़ूल ज़वाब प्रदेश के लोग समय आने पर पक्के तौर पर देंगे।

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