उज्जैन : उज्जैन-हाल ही में उज्जैन में जहरीला नशा करने से हुई भुक्षुक व्यक्तियों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री द्वारा एसआईटी का गठन कर सख्त कार्यवाही के निर्देश तो दे दिए गए मगर क्या उन मृत्यु के असल कारण पर जाना उचित समझा,सामाजिक व मीडिया के दृष्टिकोण से नशा मतलब शराब,हम यह क्यो भूल जाते है कि निम्न से लेकर उच्च वर्ग शराब के अलावा भी कई तरह के नशीले पदार्थ का आदि हो चुका है उदाहरण के रूप में सुशांत राजपूत का केस देख सकते है,उस ही तरह उज्जैन में प्रकरण में यह बात सामने आई है कि यह जहरीला नशा शराब का नही झिंझर(टिंक्चर) नामक जहरीले रसायन का है जिससे कई लोगो की मौत हुई है मगर प्रशासन के पास इसे रोकने के लिए कोई कानून नही है यह शहर के मेडिकल स्टोर पर आपको आसानी से उपलब्ध हो जाएगा।इसका उपयोग मेडिकल प्रक्रिया में आदि में किया जाता है। प्राथमिक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि इस तरह के नशे की लत मृतकों को काफी समय से थी इसका मतलब प्रशासन की नाक के नीचे वाइटनर आदि की तरह का यह जहरीला रासायन भी खुले आम बाजार में बिक रहा है जिसकी सुध लेने वाला कोई नही? अब देखना यह है कि इस चुनावी समय मे मुख्यमंत्री इस नए तरह के नशे की बिक्री हेतु कोई नियम बनाते है या रतलाम जहरीली शराब कांड की तरह उज्जैन में भी खानापूर्ति में कार्यवाही करते है।