कमलनाथ ने प्रदेश के विकास का सुंदर ब्ल्यू प्रिंट बनाया था -अजयसिंह

Chhattisgarh

अरुण गुप्ता : भपाल :पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने कहा कि यह बुंदेलखंड की धरती है जहां गद्दारों को बर्दाश्त नहीं किया जाता। गोविंद सिंह राजपूत ने अपनी मातृ संस्था कांग्रेस का सौदा किया है। बेंगलोर में 50 करोड़ से उनका पेट नहीं भरा तो उन्होंने शिवराज सिंह से अपनी ज्ञानोदय कम्पनी के लिए 130 करोड़ रुपये मंजूर करा लिए। बुंदेलखंड के स्वाभिमानी लोग दलबदलू और लोभी गोविंद सिंह राजपूत को जरूर सबक सिखाएंगे।

सिंह आज यहां सुरखी विधानसभा क्षेत्र के जैसीनगर में कांग्रेस प्रत्याशी पारुल साहू के पक्ष में एक बड़ी सभा को सम्बोधित कर रहे थे। वे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ यहां पंहुचे थे। उन्होंने कहा कि राहुल जी ने कमलनाथ जी को मध्यप्रदेश भेजा कि मध्यप्रदेश में नया इतिहास रचो। श्री नाथ ने मध्यप्रदेश के विकास का एक ब्ल्यू प्रिंट बनाया, चालीस साल का अनुभव लगाया। पर कुछ लोगों को यह रास नहीं आया क्योंकि वे भू माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्यवाही कर रहे थे। ऐसा करके उन्होंने कौन सा गुनाह किया था जो षड्यंत्र रच के अच्छी खासी चल रही उनकी सरकार गिरा दी गई।
अजयसिंह ने कहा कि भाजपा के प्रत्याशी ये वही गोविंद सिंह राजपूत हैं जिन्हें कांग्रेस ने चार बार उम्मीदवार बनाया। उन्हें यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया। मंत्री भी बनाया। लेकिन वे ग्वालियर के महाराज के पीछे पीछे सुरखी के छोटे महाराज बन गए। जो पहले मोतीनगर थाने के सामने एक छोटे से मकान में रहते थे वे आज किला कोठी में रहते हैं। उन्होंने रंगदारी से एक भी ठेका दूसरे को नहीं लेने दिया। अपने ही कांग्रेसियों को धमकाने और फर्जी केस लगाकर जेल भिजवाने की शिकायतें मेरे पास आती रहती थीं। उन्होंने लोभ में पड़कर दल बदलने में जरा भी संकोच नहीं किया। ऐसे दलबदलू की संस्था को अभी 25 एकड़ जमीन दान में दे दी गई। उनका प्रचार करने अभी मामाजी आने वाले हैं जिन्हें गोविंद सिंह ने हमेशा कोसा है। अब जब दोनों विरोधाभासी गले मिलेंगे तो यहाँ के भाई गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह को कैसा लगेगा| उनकी हालत ऐसी हो गई है कि “न निगले जा रहे हैं और न उगले जा रहे हैं।
सिंह ने कहा कि यह थोपा हुआ उपचुनाव दलबदलुओं का चुनाव है। जिन्होंने प्रजातंत्र को धता बताया है। अब उन्हें सबक सिखाने का समय आ गया है।उन्होंने पारूल साहू को जिताने की अपील करते हुए कहा कि आपके निर्णय से पूरे देश में यह संदेश जायेगा कि विधायकों द्वारा दलबदल करके सरकार गिराने और उपचुनाव थोपने की परिपाटी को जनता ने सिरे से नकार दिया है। प्रजातन्त्र को बचाये रखने के लिये यह जरुरी है।

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