कोरोना की आड़ में प्रदेश सरकार शराब पर टैक्स लगाकर पैसा कमाना चाहती है : डॉ. सिंह

Chhattisgarh

रायपुर : भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार की दोपहर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती अनुसुइया उईके को पांच सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा है और साथ ही इन मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है। प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विक्रम उसेंडी, राष्ट्रीय महासचिव व संसद सदस्य सरोज पांडेय, अजजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व संसद सदस्य रामविचार नेताम, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष व संसद सदस्य सुनील सोनी, पूर्व मंत्रीद्वय बृजमोहन अग्रवाल व अजय चंद्राकर आदि सम्मिलित थे। पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपते हुए सरकार को जरूरी दिशा-निर्देश दिए जाने की मांग की है।

भाजपा ने कहा है कि श्वेत पत्र जारी कर यह बताया जाना चाहिए कि कोरोना आपदा के बीच मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर खड़े करने के लिए राज्य सरकार ने कितनी राशि खर्च की है? पार्टी ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी की मांग करते हुए कहा है कि कोरोना की आड़ में सरकार शराब पर टैक्स लगाकर पैसा कमाना चाहती है। ज्ञापन सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि राज्यपाल को हमने प्रदेश सरकार की हर मोर्चे पर विफलता और वादाख़िलाफ़ी की जानकारी दी है। गरीबों को राज्य में लूटा जा रहा है। राजस्व बढ़ाने अधिक कीमत पर शराब बेचकर गरीब से पैसा लिया जा रहा है। सरकार कोरोना से लड़ाई शराब के पैसे से लड़ना चाहती है। शराब पर टैक्स लगा दिया। पहली बार ऐसा हो रहा है कि शराब पर टैक्स कोरोना और गौठान के लिए लिया जा रहा है। अच्छे काम करना है तो पैसे भी अच्छे होने चाहिए। मजदूर-परिवारों के बर्तन बिक रहे हैं, महिलाओ में गहने बिक रहे हैं। यह सरकार पाँच हजार करोड़ के राजस्व के लिए शराब दुकान खोलकर बैठी है। इसे तत्काल छत्तीसगढ़ में बंद किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने अपने जनघोषण पत्र में ये वादे किए थे।
भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सिंह ने कहा कि 1.60 लाख से ज्यादा मजदूर अलग-अलग राज्यों में भटक रहे हैं। उनके लिए अभी तक सरकार की कोई कार्ययोजना नहीं बनी है। हम यहां जनता और मजदूरों की पीड़ा को प्रकट करने आये हैं। सरकार निर्दयतापूर्वक पिछले 40-50 दिन से सिर्फ और सिर्फ बयानबाज़ी कर रही है। केंद्र सरकार से पैसे मांगने के लिए 22 पत्र लिखकर एक कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। लेकिन जो प्राथमिक जवाबदारी है, उससे भागने का काम भूपेश बघेल ने किया है। यदि ज़रा भी संवेदना उनमें होती, तो छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ ऐसा नहीं करते। डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के मजदूर भूखे जी रहे हैं, सड़कों पर पैदल चलते-चलते किसी की जान जा रही है, कोई ट्रक से कुचलकर जान गवा रहा है। हजारों की संख्या में लोग पैदल चलते हुए छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर रहे हैं। हमारी मांग के बाद भी मुख्यमंत्री ने यह नहीं सोचा कि विपक्षी दलों के साथ बैठकर अपनी बनाई गई कार्ययोजना के बारे में जानकारी दें, हमें विश्वास में लें। बीजेपी पूरे प्रदेश में सेवा कार्यों में जुटी हुई है और हम ये करते रहेंगे। इसमें हमें भूपेश बघेल से पूछने की जरूरत नहीं है। सोशल डिस्टेंसिग के साथ हम ये काम कर रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मजदूर भूखों मर रहे हैं। कई जगहों से रोजाना फोन आ रहे हैं। इलाहाबाद की सड़कों में मजदूर भीख मांगने मजबूर हैं। लखनऊ और कानपुर में मजदूरों के पैसे खत्म हो गए हैं। खाने के लिए वे दूसरों पर निर्भर हैं। अन्य राज्यों ने अपने प्रदेश के मजदूरो को एक हजार रुपये दे दिया लेकिन छत्तीसगढ़ में मजदूरों के खाते में अब तक पैसे नहीं डाले गए। मजदूरों की संख्या 1.60 लाख है, लेकिन सिर्फ आठ सौ मजदूरों को 400-400 रुपये दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अद्भुत राज्य है छत्तीसगढ़, जहाँ दूसरे राज्यों से जो अनुमति लेकर यहां आ रहा है, उन्हें भी बॉर्डर पर रोका जा रहा है। डॉ. सिंह ने कहा कि जो पास लेकर पैदल आ रहे हैं, उन्हें बगैर जांच के छोड़ा जा रहा है। कोई थर्मल टेस्टिंग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसानों की भी हालत खराब है। धान खरीदी की डिफरेंस की राशि किसानों को नहीं दी गई है। दो साल का बोनस नहीं दिया गया है। यह दिया जाना चाहिए। जिन किसानों को धान खरीदी का टोकन दे दिया गया है, उनसे धान खरीदने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।
इधर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री उसेंडी ने कहा कि कोरोना के लिए जारी की गई एडवायजरी को ध्यान में रखते हुए शराब दुकान खोले जाने, दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों के लिए स्पष्ट कार्ययोजना नहीं होने, धान खरीदी में लेटलतीफी, समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ कल 12 मई को प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ता एक दिन का धरना देंगे। यह धरना बीजेपी के नेता-कार्यकर्ता अपने-अपने घरों के बाहर ही देंगे। हम चाहते हैं कि सरकार गरीब जनता के साथ न्याय करे और यही हमारी मांग है।

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