“व च़राग और होंगे ,जो तेज़ हवाओं से बुझते हों… हमने तो जलने का हुनर ही तूफ़ानों से सीखा है..”   हम जीते है और सीखे है :-जोगी

Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ : रायपुर में प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए अजित जोगी बोले कि (1) छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा एक क्षेत्रीय पार्टी को मान्यता मिली है: हमारे गठबंधन ने 7 सीटें जीतीं, अकलतरा, चंदरपुर और तखतपुर जैसी 7 अन्य सीटों में बहुत कम अंतर से दूसरे स्थान पर रही और 15 सीटों में हमारे उम्मीदवारों को 30% से ज्यादा वोट मिला। कम से कम 11 में से २ लोकसभा सीटों में- जाँजगीर और बिलासपुर- हमारे पास दोनों राष्ट्रीय दलों की तुलना में अधिक वोट शेयर है। कुल मिलाकर, अब हमें राज्य के लगभग 14% मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है।

यह एक पार्टी के लिए कोई छोटी उपलब्धि नहीं है- जिसे 2 साल से भी कम समय पहले बनाया गया था; जिसे केवल दो महीने पहले उसका चुनाव चिन्ह मिला था; और जिसके पास दोनों राष्ट्रीय पार्टियों, जिनके पास हजारों करोड़ों रुपए का फ़ंड है, की तूलना में ख़ुद के कोई संसाधन भी नहीं थे। ले दे के हम केवल 5 समाचार पत्रों में एक-चौथाई पृष्ठ विज्ञापन दे पाएँ और टीवी या रेडियो में तो कोई भी विज्ञापन नहीं दे सके। हमारे गठबंधन के अधिकांश उम्मीदवारों ने कुछ लाख रुपए से कम के बेहद कम बजट पर चुनाव लड़ा। संक्षेप में, हमने इस चुनाव में राष्ट्रीय दलों की तूलना में मात्र 1% से भी कम खर्च किया।

इन सबके बावजूद, अगर सत्तारूढ़ बीजेपी केवल 15 सीटें लेकर पूरी तरह ध्वस्त नहीं हो जाती, और छत्तीसगढ़ में भी अन्य दो राज्यों एमपी और राजस्थान की तरह सम्माजनक स्थिति में रहती, तो हमारे गठबंधन ने निश्चित रूप से सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई होती। वास्तविकता यह है कि छत्तीसगढ़ की 80% सीटों में मुक़ाबला त्रिकोणी नहीं रहा: यह “सत्ता” और “जनता” के बीच सीधी प्रतियोगिता थी और चूंकि राज्य के लोगों ने इसके पहले कभी भी तीसरे विकल्प को नहीं देखा था, इसलिए उन्होंने कांग्रेस को भाजपा का एकमात्र व्यवहारिक विकल्प के रूप में देखकर उसे वोट दिया। यहां तक ​​कि बीजेपी के मूल मतदाता भी कांग्रेस को बड़े पैमाने में स्थानांतरित हो गए जिसके चलते कांग्रेस के अधिकांश उम्मीदवारों ने 35,000 + वोटों से अधिक मार्जिन से जीत हासिल की!

असल में अब भी ज्यादातर मतदाता कांग्रेस के साथ जोगी की पहचान करते हैं क्योंकि हमारी पार्टी का नाम ‘जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे’ है। इस संबंध में, सवप्रथम, हमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी से अपने आप की अलग पहचान स्थापित करने के लिए और ठोस कदम उठाने की जरूरत है। दूसरा, हमें बस्तर और सरगुजा संभागों में नए सिरे से शुरुआत करने की जरूरत है, जहां, हमारे कड़ी मेहनत के बावजूद, हम कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं डाल पाए हैं। तीसरा, हम एक गैर-कांग्रेस गैर-बीजेपी गठबंधन के हिस्से के रूप में बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बेहन मायावती जी के साथ मिलकर राज्य की सभी 11 लोकसभा सीटों में छत्तीसगढ़ के लोगों को राष्ट्रीय राजनीति में सशक्त आवाज देने के स्पष्ट उद्देश्य के साथ चुनाव लड़ेंगे। चौथा, हम अपने उम्मीदवारों को इस साल के अंत में होने वाले सभी स्थानीय नगरी निकाय और पंचायत चुनावों में भी मैदान में उतारेंगे। पाँचवा, हमारा गठबंधन सहयोगी सीपीआई और एआईटीयूसी के साथ मिलकर, राज्य में श्रमिकों के आंदोलन को मजबूत करने और असंगठित क्षेत्र तक विस्तारित करने के लिए अथक रूप से काम करेगा। छठवा, हम छात्रों को राजनीतिक मुख्यधारा में लाने के लिए राज्य में सभी छात्र संगठन चुनावों में भाग लेंगे। सातवाँ, हम अपने पार्टी को राज्यव्यापी सर्व-समावेशी लोगों के आंदोलन में बदलने के लिए अथक रूप से काम करेंगे जो छत्तीसगढ़ के सभी लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं- जिन्हें हमारे सर्वोच्च नेता के 14-बिन्दु शपथ पत्र में हम उल्लेखित कर चुके हैं- पर खरा उतरे।

हमें एहसास है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को मुख्य रूप से ऋण माफ़ी के वादे पर वोट दिया गया है और उनके नेता ने ऐसा करने के लिए 10 दिनों का समय तय किया है। उन्होंने पूरे राज्य में शराब बंदी लागू करने और सभी सरकारी नौकरियों के नियमितकरण का वादा भी किया है। राज्य की पहली और एकमात्र मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय विपक्षी दल के रूप में, यह देखना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य होगा कि उपरोक्त सभी वादों को घोषित समय सीमा के भीतर पूरा करा जाए। उस हद तक, हम नई सरकार को हर सम्भव सहयोग करेंगे।

हमारे लिए बहुत गर्व का विषय है कि अब पहली बार छत्तीसगढ़ में मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी का जन्म हो चुका है। जिन्होंने कहा कि राज्य में एक क्षेत्रीय पार्टी के लिए कोई जगह नहीं थी, वे सब गलत साबित हुए है। जिस लक्ष्य को लेकर स्वर्गीय श्री खुबचंद बघेल (1970-80), स्वर्गीय श्री विद्या चरण शुक्ला (2002-4) और स्वर्गीय श्री तारचंद साहू (2008-12) ने इतनी मेहनत करने के बावजूद सफलता प्राप्त नहीं कर सके, उसे हमने श्री अजीत जोगी के नेतृत्व में, चुनाव चिन्ह मिलने के लगभग दो महीने की छोटी अवधि में प्राप्त कर लिया है। हमारे द्वारा जीती अधिकांश सीटों में कांग्रेस के पक्ष में जबरदस्त लहर के बावजूद उसके प्रत्याशी तीसरे स्थान पर ही रहे। बावजूद इसके महागठबंधन द्वारा जीती गयी  7 में से 5 सीटों पर न केवल कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे बल्कि तीन सीटों पर तो कांग्रेस के प्रत्याशी जमानत भी नहीं बचा पाए। निःसन्देह छत्तीसगढ़ की जनता ने आगामी चुनावों के लिए हमारी पार्टी की एक मजबूत नींव तैयार कर दी है।                                                        राज्य की पहली और एकमात्र मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी के रूप में हम दोनों राष्ट्रीय दलों को “छत्तीसगढ़ प्रथम” सिद्धांत को अपनाने के लिए मजबूर करते रहेंगे। इस सिद्धांत के विपरीत सरकार के कोई भी निर्णय का हम विधान सभा के अंदर और बाहर पुरज़ोर विरोध करेंगे।(2) जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के संस्थापक अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी ने राज्य सरकार पर आदिवासी और अनुसूचित जाति वर्ग की अवहेलना किये जाने का आरोप लगाया है। जोगी ने कहा कि सामूहिक नेतृत्व दर्शाने के लिए कई दिनों की मशकत्त के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ दो अन्य मंत्रियों टी.एस. सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू का मंत्री के रूप में शपथ लेना स्वागतयोग्य है लेकिन जिस आदिवासी समाज ने अनुसूचित जनजाति की आरक्षित 25 सीटों पर कांग्रेस के विधायकों को जिता कर भेजा और अनुसूचित जाति  जिसने अपनी आरक्षित 6 सीटों पर कांग्रेस को जिताया, क्या इन समाज के किसी विधायक को भी मुख्यमंत्री के शपथग्रहण के दिन इन वर्गों मंत्रियों के साथ मंत्रिपद की शपथ नहीं दिलवाई जानी थी? साथ ही अति पिछड़ा वर्ग- पहली बार कोई विधायक निषाद समाज से निर्वाचित हुआ है, यादव और मरार भी हैं- को भी कोई प्रतिनिधतिव नहीं दिया गया है।

जोगी ने कहा  कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह समेत राष्ट्रीय राजनीती के अनेकों दिग्गजों की मौजूदगी में अनुसूचित जाति, आदिवासी और अति पिछड़ा वर्ग के विधायक को मंत्री के रूप में शपथ लेते हुए ये समाज गौरवान्वित होते। ऐसा न करके कांग्रेस पार्टी ने यह दिखा दिया है कि उनकी नज़रों में इन समाजों को दोहरा-दर्जे के नागरिक है- जिनका तीन-सदसीय सामूहिक नेतृत्व में कोई स्थान नहीं है। अजीत जोगी ने सवाल किया कि जब मंत्रियों के नाम कांग्रेस आलाकमान द्वारा दिल्ली में तय किये गए थे तो क्या इन सामाजों को प्रतिनिधित्व दिए जाने वाली इतनी महत्वपूर्ण बात आलाकमान के संज्ञान में नहीं आयी थी? जो ग़लतियाँ भाजपा ने करी थी, उसी को कांग्रेस दोहरा रही है।जब मंत्रियों के नाम कांग्रेस आलाकमान द्वारा दिल्ली में तय किये गए थे तो क्या इन दोनों सामाजों को प्रतिनिधित्व दिए जाने वाली इतनी महत्वपूर्ण बात आलाकमान के संज्ञान में नहीं आयी थी? यदि कांग्रेस का इन समाजों  के प्रति यही रवैया रहा तो आगामी लोकसभा चुनावों में इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ेगा।     (3) नयी सरकार द्वारा किसानों को 2500 रूपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और सहकारी बैंकों से लिए गए कर्ज की कर्जमाफी के निर्णय का हम स्वागत करते हैं। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि 90% किसानों ने साहुकारों तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं जैसे नाबार्ड आदि से कर्ज लिया हुआ है। उन्हें कर्जमाफी का लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा? इसे सिर्फ सहकारी बैंकों तक क्यों सीमित कर रखा है? पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने आपातकाल के दौरान किसानों के सभी प्रकार के ऋण की एकमुश्त कर्जमाफी की घोषणा की थी। ऐसा ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को भी करना चाहिए। तभी उनका चुनाव पूर्व जन घोषणा पत्र में किया गया वायदा पूरा होगा।

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