पटवारियों की हड़ताल पर , धान खरीदी की तैयारियों पर संकट के बादल ,राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा बोले- हड़ताल खत्म कर चर्चा के लिए आएं,

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पटवारियों की हड़ताल ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। पटवारियों के आंदोलन को लेकर सरकार और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने हड़ताल को किसानों के लिए परेशानी का सबब बताते हुए पटवारियों से काम पर लौटने की अपील की है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर दमनकारी और तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। इस टकराव के बीच सबसे बड़ा सवाल धान खरीदी की तैयारियों को लेकर खड़ा हो गया है। खरीदी का समय नजदीक है, लेकिन पटवारियों की हड़ताल के चलते किसान पंजीयन और राजस्व संबंधी काम प्रभावित होने की आशंका गहराने लगी है।

मंत्री बोले- किसानों को परेशान करना उचित नहीं

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने पटवारियों की हड़ताल पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पटवारी किसानों को परेशान करने के लिए हड़ताल पर गए हैं। इससे पहले भी पटवारी तीन बार हड़ताल कर चुके हैं और उनकी मांगों को पूरा किया गया था। इस बार बिना पूर्व सूचना के हड़ताल पर जाना उचित नहीं है। मंत्री ने कहा कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है। पटवारी हड़ताल समाप्त कर चर्चा के लिए आएं, उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। सरकार सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर काम करती है और पटवारियों के हितों पर भी विचार करेगी।

बैज का पलटवार- बातचीत के बजाय निलंबन की कार्रवाई

इधर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर पटवारियों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। बैज ने कहा कि पटवारी अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार बातचीत का रास्ता अपनाने के बजाय निलंबन की कार्रवाई कर रही है। सैकड़ों पटवारियों के निलंबन और सर्विस ब्रेक की धमकी को उन्होंने अलोकतांत्रिक और तानाशाहीपूर्ण रवैया बताया। बैज के मुताबिक, नए पीवी ऐप के विरोध सहित विभिन्न मांगों को लेकर जारी आंदोलन का सीधा असर किसानों के कामकाज पर पड़ रहा है। किसान पंजीयन नहीं करा पा रहे हैं और खसरा-खतौनी में सुधार जैसे जरूरी राजस्व कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

धान खरीदी से पहले बढ़ी किसानों की चिंता

पटवारियों की हड़ताल ऐसे समय जारी है, जब प्रदेश में धान खरीदी की तैयारियां तेज होनी चाहिए। किसान पंजीयन और जमीन संबंधी रिकॉर्ड में सुधार की प्रक्रिया समय पर पूरी होना जरूरी है। ऐसे में आंदोलन लंबा खिंचने पर खरीदी की तैयारियों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल सरकार पटवारियों से काम पर लौटने की अपील कर रही है, जबकि कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेर रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और पटवारी संगठन के बीच बातचीत कब शुरू होती है और क्या धान खरीदी से पहले इस गतिरोध का समाधान निकल पाएगा।

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