राज्योत्सव 2026 में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को मिला प्रथम पुरस्कार

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रायपुर, 03 नवंबर 2026/ छत्तीसगढ़ के 26वें स्थापना दिवस पर नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव स्थल में लगाई गई विभागीय प्रदर्शनियों में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंडप ने बाजी मारते हुए “प्रथम पुरस्कार”हासिल किया है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के विशेष मार्गदर्शन में ‘बदलता बस्तर – संवरता छत्तीसगढ़’ की जीवंत थीम पर आधारित इस प्रदर्शनी को सर्वश्रेष्ठ चुना गया। राज्योत्सव के समापन एवं अलंकरण समारोह में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से अपर मुख्य सचिव (ACS) मनोज कुमार पिंगुआ और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (PCCF & HoFF) अरुण कुमार पाण्डेय ने यह प्रथम पुरस्कार ग्रहण किया।

वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और वन धन केंद्रों से जुड़े सभी सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। इससे पूर्व राज्योत्सव के दौरान वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने स्वयं विभागीय स्टॉल का बारीकी से निरीक्षण कर उत्साहवर्धन किया था। उन्होंने वहां आत्मसमर्पित महिलाओं एवं वन धन केंद्रों के सदस्यों से आत्मीय चर्चा की, लहसुन व वनोपज से बनी सिरदर्द की औषधि को सूंघकर परखा और कोदो से बने बिस्कुट का स्वाद चखते हुए विभागीय प्रयासों की सराहना की थी।

तीन द्वार और ‘वॉक-थ्रू गैलरी’ ने कराया बस्तर के जंगलों का सजीव अनुभव :-

लगभग 88×30 फीट में तैयार किया गया यह मंडप एक ‘वॉक-थ्रू गैलरी’ के रूप में सजाया गया था, जिसके अग्रभाग में तीन भव्य प्रवेश द्वार—जगदलपुर की जनजातीय गौरव वाटिका का द्वार, बीजापुर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व का प्रसिद्ध ‘चेंदरू द्वार’ (आदिवासी बालक चेंदरू और बाघ की मित्रता का प्रतीक) और दंतेवाड़ा के वन मंदिर का द्वार बनाए गए थे। ये तीनों द्वार जनजातीय संस्कृति, वन्यजीव सह-अस्तित्व और प्रकृति के प्रति आस्था को दर्शाते हैं।

पहला भाग: ‘बदलता बस्तर’ — भय से विश्वास और पर्यटन तक का सफर :-

मंडप के पहले हिस्से में दिखाया गया कि जिस बस्तर को कभी भय और हिंसा के नाम से जाना जाता था, वह आज आस्था, इको-टूरिज्म और आजीविका की नई इबारत लिख रहा है:

बंदूक से कैफे तक: –

प्रदर्शनी का सबसे भावनात्मक केंद्र सुकमा का ‘टुंगल बांध’ रहा, जहां हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटी महिलाएं स्वयं ‘टुंगल कैफे’ चला रही हैं और स्थानीय युवा नौका-विहार व कयाकिंग के जरिए रोजगार पा रहे हैं।

विश्व पटल पर बस्तर का इको-टूरिज्म: –

कांगेर घाटी के समीप स्थित ‘ढुढमारास’ गांव के होमस्टे (जिसे संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम कार्यक्रम के लिए चुना गया है), कोण्डागांव की पुष्पाल वैली के इको-कॉटेज, तीरथगढ़ जलप्रपात और इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मट्टीमरका क्षेत्र के आकर्षक मॉडलों ने दर्शकों को खूब लुभाया। आस्था और रोजगार:-

बस्तर में 572 देवगुड़ियों का जीर्णोद्धार, मनरेगा से 21.67 लाख मानव दिवस का रोजगार और कांकेर में 35 जिप्सियों के संचालन से 200 स्थानीय युवाओं को मिले रोजगार की झलक भी प्रदर्शित की गई।

दूसरा भाग: ‘संवरता छत्तीसगढ़’ — वन संरक्षण और हरियाली के नए कीर्तिमान :-

मंडप के दूसरे भाग में पूरे प्रदेश में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को त्रि-आयामी (3D) मॉडलों और सजीव प्रदर्शनों से दिखाया गया: –

पहला रामसर स्थल व वन्यजीव पुनर्स्थापना:-

दिसंबर 2025 में छत्तीसगढ़ के पहले रामसर स्थल (अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि) का दर्जा पाने वाले बिलासपुर के ‘कोपरा जलाशय’, बारनवापारा अभयारण्य में दशकों बाद काले हिरण (ब्लैकबक) की सफल वापसी (जिसका जिक्र प्रधानमंत्री जी ने ‘मन की बात’ में भी किया) और औरापानी गिद्ध संरक्षण क्षेत्र के प्रयासों को प्रमुखता से दर्शाया गया।

‘गज संकेत’ ऐप और गजरथ यात्रा: –

मानव-हाथी द्वंद्व रोकने और सह-अस्तित्व का संदेश देने के लिए ‘गजरथ यात्रा’ और कॉल, एसएमएस व व्हाट्सऐप से ग्रामीणों को अलर्ट करने वाले ‘गज संकेत’ ऐप का लाइव डेमो दिया गया।

रिकॉर्ड पौधरोपण:- ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत वर्ष 2024 में 3.50 करोड़ और वर्ष 2025 में लक्ष्य से 215 प्रतिशत अधिक 3.55 करोड़ पौधों के रोपण तथा ‘किसान वृक्ष मित्र योजना’ के अंतर्गत 36,896 किसानों द्वारा 62,441 एकड़ भूमि पर लगाए गए 3.67 करोड़ पौधों की उपलब्धि प्रदर्शित की गई।

रोचक गेम्स, इनाम और डिजिटल बारकोड से जुड़े युवा व दर्शक :-

फोटो-दीवारों के बजाय इस बार मंडप को पूरी तरह इंटरैक्टिव और हाईटेक बनाया गया था। वन, पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए स्टॉल में विशेष गेम्स और क्यूआर (QR) आधारित प्रश्नोत्तरी (क्विज) रखी गई थी, जिसमें विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार भी दिए गए। साथ ही, स्टॉल पर विशेष बारकोड/क्यूआर कोड लगाए गए थे, जिन्हें स्कैन कर दर्शक सीधे विभाग की विशेष वेबसाइट (https://forest.cg.gov.in/rajyotsav/index.html) से जुड़कर छत्तीसगढ़ वन विभाग की योजनाओं और प्रदेश के इको-टूरिज्म पर्यटन स्थलों की विस्तृत जानकारी अपने मोबाइल पर पढ़ रहे थे। युवाओं के लिए 360-डिग्री वीडियो अनुभव, प्रकाश व ध्वनि प्रभाव और सेल्फी-पॉइंट भी आकर्षण का केंद्र रहे।

बांस शिल्प और ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ की रही धूम :-

संयुक्त वन प्रबंधन स्टॉल पर ग्रामीण कारीगरों द्वारा बांस से बनाए गए घर, नाव, लालटेन व सजावटी सामान और ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के स्टॉल पर वन धन केंद्रों द्वारा तैयार शुद्ध शहद, सफेद मूसली, त्रिफला चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू और महाभृंगराज तेल की जमकर बिक्री हुई। वहीं, औषधीय पादप बोर्ड ने घर की बाड़ी में सिंगी और सतावर जैसे औषधीय पौधे लगाकर महिलाओं को सालाना 20 से 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित करने की राह दिखाई। अंततः, वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में तैयार वन विभाग का यह मंडप यह संदेश देने में पूरी तरह सफल रहा कि जब वन, वनवासी और शासन साथ चलते हैं, तो जंगल भय का नहीं, बल्कि विश्वास, आजीविका और गौरव का प्रतीक बन जाता है।

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