रायपुर : पिता की बेरहम पिटाई से घायल मासूम और उसके भाई-बहनों को बचाने आगे आए मोहल्लेवासी, पुलिस तक पहुंचाई सूचना; समाज के कर्मवीरों का सम्मान कर बढ़ाया हौसलारायपुर के पंडरी स्थित तरुण नगर में पांच साल के मासूम बच्चे के साथ हुई क्रूरता की घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया था। आरोप है कि बच्चे के सौतेले पिता ने उसकी बेरहमी से पिटाई की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मामले में बच्चे की मां और सौतेले पिता के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।

इस दर्दनाक घटना के बीच कुछ जागरूक नागरिक ऐसे सामने आए, जिन्होंने संवेदनशीलता और साहस का परिचय देते हुए न केवल घायल बच्चे, बल्कि उसके भाई-बहनों की सुरक्षा के लिए भी पहल की।मोहल्ले के रहवासियों ने घटना की जानकारी मिलने पर चुप रहने के बजाय आगे बढ़कर बच्चों को सुरक्षित कराने में मदद की। पुलिस को सूचना दी गई और बच्चों को अस्पताल पहुंचाकर इलाज कराने में सहयोग किया गया। समय पर सामने आए इन नागरिकों की भूमिका ने यह साबित किया कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए बड़े पद की नहीं, बल्कि संवेदनशील सोच और साहस की जरूरत होती है।
खामोशी नहीं, इंसानियत दिखाई :-
बच्चों की सुरक्षा के लिए बने ढालघटना के बाद बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और उनकी देखभाल में सहयोग करने वाले जागरूक नागरिकों के प्रयासों की सराहना की गई। इसी क्रम में अपनी टीम के साथ पहुंचकर इन कर्मवीरों का सम्मान किया गया। सम्मान के माध्यम से उन लोगों का हौसला बढ़ाने की कोशिश की गई, जिन्होंने एक संवेदनशील मामले में जिम्मेदारी निभाते हुए पीड़ित बच्चों की मदद के लिए कदम उठाया।
इस पहल का उद्देश्य केवल सम्मान करना नहीं, बल्कि समाज के सामने एक जरूरी संदेश रखना भी है कि बच्चों के साथ हिंसा, प्रताड़ना या किसी भी तरह की क्रूरता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। आसपास कहीं भी ऐसी घटना दिखाई दे या इसकी जानकारी मिले, तो जागरूक नागरिकों को पीड़ित की मदद के लिए आगे आना चाहिए और पुलिस तथा संबंधित प्रशासन को सूचना देनी चाहिए।
समाज से अपील: –
बच्चों पर अत्याचार के खिलाफ उठाएं आवाजबच्चे अपनी सुरक्षा के लिए बड़ों पर निर्भर होते हैं। ऐसे में उनके साथ होने वाली हिंसा के मामलों में समाज की चुप्पी अपराध करने वालों का हौसला बढ़ा सकती है। तरुण नगर की घटना में स्थानीय नागरिकों की सक्रियता इस बात का उदाहरण है कि समय पर उठाया गया कदम किसी पीड़ित की मदद करने में अहम साबित हो सकता है।इस सम्मान कार्यक्रम के जरिए लोगों से अपील की गई कि वे अपने आसपास होने वाली ऐसी घटनाओं के प्रति सजग रहें, पीड़ितों का सहयोग करें और कानून के दायरे में रहकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कराने में भूमिका निभाएं। समाज की असली ताकत तभी दिखाई देती है, जब किसी कमजोर और असहाय व्यक्ति के साथ अन्याय होने पर लोग तमाशबीन बनने के बजाय उसकी मदद के लिए आगे आते हैं।