बीजापुर, 12 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। ओडिशा में सक्रिय चार माओवादी कैडरों समेत कुल छह माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर बीजापुर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें चार PPCM और दो PM रैंक के कैडर शामिल हैं।पुलिस के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों के लगातार नक्सल विरोधी अभियानों और पुनर्वास कार्यक्रमों से प्रभावित होकर इन माओवादियों ने संगठन छोड़ने का फैसला लिया।

इस प्रक्रिया में डीआरजी बीजापुर, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 170वीं बटालियन और बीजापुर पुलिस के बीच समन्वय की अहम भूमिका रही।चार कैडरों पर आठ-आठ लाख का इनामआत्मसमर्पण करने वालों में रानी सोढ़ी उर्फ संध्या (30), पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता (28), सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष (27) और कोसा माड़वी उर्फ सतीश (30) शामिल हैं। इन चारों पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था।वहीं, देवे मड़कम उर्फ जन्नी (22) पर दो लाख रुपये और लालू ताती (25) पर एक लाख रुपये का इनाम था। इस तरह सभी छह कैडरों पर घोषित इनाम की कुल राशि 35 लाख रुपये बताई गई है।लंबे समय से संगठन में सक्रिय थे कैडरपुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले कई कैडर लंबे समय से माओवादी संगठन में सक्रिय थे। रानी सोढ़ी वर्ष 2012 से संगठन से जुड़ी थी और बाद में ओडिशा की कंपनी नंबर 8 में PPCM के पद पर काम कर रही थी। पांडो पोड़ियम वर्ष 2015 में संगठन में शामिल हुई थी और दिसंबर 2025 में उसे PPCM की जिम्मेदारी दी गई।सुक्कू कुड़ियम वर्ष 2005 से संगठन से जुड़ा था।
वह ओडिशा में वरिष्ठ माओवादी नेताओं के सुरक्षा गार्ड के रूप में भी काम कर चुका था। कोसा माड़वी वर्ष 2005 से माओवादी संगठन में सक्रिय था और कंपनी नंबर 2 में PPCM तथा ए-सेक्शन कमांडर की जिम्मेदारी संभाल रहा था। पुलिस के अनुसार, वह स्वास्थ्य संबंधी कारणों से जनवरी 2026 से संगठन से अलग होकर फरार चल रहा था।देवे मड़कम वर्ष 2015 से संगठन में सक्रिय थी और ओडिशा में कंपनी नंबर 8 के साथ काम कर चुकी थी। वहीं, लालू ताती वर्ष 2010 में बाल संगठन से जुड़ा था और बाद में PLGA तथा गंगालूर एरिया कमेटी में सक्रिय रहा। पुलिस के मुताबिक, दोनों हाल के महीनों में संगठन से अलग हो गए थे।कई मुठभेड़ों और हमलों में शामिल होने का दावापुलिस द्वारा जारी विवरण में आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों की विभिन्न माओवादी गतिविधियों में कथित संलिप्तता का भी उल्लेख किया गया है।
इनमें ओडिशा में पुलिस अभियानों और मुठभेड़ों के अलावा छत्तीसगढ़ के कुछ कैंपों पर हमले की घटनाएं शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, कुछ कैडर सुरक्षा बलों पर हमलों और मुठभेड़ों में भी शामिल रहे हैं।पुनर्वास और रोजगार में मिलेगी मददछत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले सभी छह कैडरों को नियमानुसार आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और रोजगार से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लौटने तथा सम्मानजनक जीवन शुरू करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग भी दिया जाएगा।पुलिस का कहना है कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई, माओवादी संगठन के भीतर बढ़ते दबाव और पुनर्वास नीति के प्रति विश्वास के कारण कैडर हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं। बीजापुर में छह माओवादियों का एक साथ आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों और प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।