सत्ता के संरक्षण में ऑयल पाम घोटाला, किसान ठगे जा रहे हैं, हॉर्टिकल्चर विभाग खपा रहा है दूसरे राज्यों का रिजेक्टेड स्टॉक : सुशील आनंद

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रायपुर 29अगस्त 2026। पाम ऑयल के घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए संचालित “नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल” योजना में गंभीर अनियमितता, भ्रष्टाचार और किसानों से ठगी करने का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि सरकार का पीपीपी आधारित बिजनेस मॉडल केवल कागज पर ही मजबूत है, जमीन पर किसानों से धोखाधड़ी की जा रही है। हॉर्टिकल्चर विभाग दूसरे राज्यों के रिजेक्टेड पौधों का स्टॉक छत्तीसगढ़ के किसानों से जबरिया लगवा रही है। गुणवत्ताहीन पौधे देकर बड़ा भ्रष्टाचार किया जा रहा है, किसानों के निवेश और मेहनत दोनों डूब रहे हैं। किसानों को मोटी कमाई का लालच देकर अंधेरे में रखा जा रहा है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि सरकार का दायित्व है कि किसानो के चयन, योजना की सब्सिडी, पौधों की गुणवत्ता को लेकर पारदर्शिता बरते और विभाग के अधिकारी सतत निगरानी करके समय-समय पर आवश्यक सहायता करे, लेकिन इस सरकार का फोकस केवल अपनी कमीशनखोरी में है, किसानों के नफे नुकसान से इनका कोई सरोकार नहीं है। योजना की शर्तों के अनुसार निजी कंपनीयों को गुणवत्ता वाले पौधे, तकनीकी सहायता, फल खरीद और प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। छत्तीसगढ़ सरकार डबल सब्सिडी और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट का भी दावा करती है, लेकिन जमीन पर तस्वीर अलग है। पुरानी कंपनियों अम्मा ऑयल पाम और 3F ऑयल पाम का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद खराब है। एक ने 13 साल में सिर्फ पौधे बेचे, प्रोसेसिंग यूनिट नहीं लगाई। दूसरी ने प्लांटेशन के बाद अचानक एग्जिट ले लिया, जिससे किसानों का निवेश डूब गए।

प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि दंतेवाड़ा और सरगुजा में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है, लेकिन कार्यवाही किसी पर नहीं हुई। किसानों की शिकायत और विभागीय पत्रों के अनुसार, प्री-यूनिक एशिया कंपनी के पौधों की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। दंतेवाड़ा की सहायक संचालक उद्यानिकी मीना मंडावी ने 29 जुलाई 2026 को पत्र लिखकर 15,222 पौधों की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई। फील्ड निरीक्षण में अनेकों खामियां उजागर हुए हैं। किसानों को वितरित पौधे सिर्फ 1.5-2 फीट ऊंचे हैं, पत्ती में स्प्लिटिंग नहीं है, पौधों की आयु 8-10 माह है जबकि मानक 12-14 माह होना चाहिए। विदेशी वैरायटी होने के बावजूद PEQ सर्टिफिकेट नहीं है, प्लांट क्वारंटीन रिलीजिंग लेटर नहीं है। इन खामियों का ठोस जवाब न कंपनी के पास है न ही जिम्मेदार अधिकारियों के पास। दंतेवाड़ा में रिजेक्ट स्टॉक अन्य जिलों में बांट दिया गया। सरगुजा में दो महीने से पौधे ही नहीं पहुंचे।

प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि सरकार की दुर्भावना से किसानों के लिए बड़ा जोखिम पैदा हो गया है। ऑयल पाम 25-30 साल की फसल है, अमानक पौधे लगने पर मृत्यु दर बढ़ गई है और उपज कम होने का अंदेशा है। हार्टिकल्चर विभाग और निजी कंपनियों की गलती का नुकसान किसान को उठाना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ में तरनजीत, जेट्रोफा, सफेद मूसली जैसी योजनाओं का भी इसी तरह का अनुभव रहा है। मुनफ़खोरी की हवश में अब ऑयल पाम योजना के नाम पर किसानों को एक बार फिर बर्बाद करने का षड्यंत्र रचा गया है।q

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