MP के 1160 करोड़ के फोर्टिफाइड चावल घोटाले की जांच में छत्तीसगढ़ कनेक्शन! राजनांदगांव की राइस मिल तक पहुंची जांच, 18 आरोपी रडार पर,किसका है हांथ!

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रायपुर/राजनांदगांव। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित 1160 करोड़ रुपये के फोर्टिफाइड चावल घोटाले की जांच अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, छिंदवाड़ा स्थित एथेनॉल प्लांट के लिए आवंटित सरकारी चावल का हिस्सा राजनांदगांव की गुरुदेव राइस मिल तक पहुंचने के संकेत मिले हैं। इस खुलासे के बाद मध्य प्रदेश पुलिस, एसआईटी और एफसीआई ने पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी है।जांच में सामने आया है कि सरकारी चावल को एथेनॉल प्लांट तक पहुंचाने के बजाय कथित तौर पर दूसरे माध्यमों से राइस मिलों तक पहुंचाया गया।

पुलिस को सीसीटीवी फुटेज, रजिस्टर एंट्री और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं।अब तक इस मामले में 18 लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है, जबकि 12 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित चावल किन-किन राइस मिलों तक पहुंचा और सरकारी अनाज की कथित हेराफेरी का नेटवर्क कैसे संचालित हुआ।मामले की शुरुआत 2 जून को हुई थी, जब बालाघाट के नवगांव वेयरहाउस से एथेनॉल प्लांट के लिए भेजे गए तीन ट्रकों की जांच में अनियमितता सामने आई।

जांच में एक ट्रक राइस मिल में मिला, जबकि अन्य ट्रक निर्धारित प्लांट तक नहीं पहुंचे। इसके बाद गठित एसआईटी ने व्यापक जांच शुरू की, जो अभी भी जारी है।जांच के दायरे में बालाघाट के पूर्व मंत्री और भाजपा नेता रामकिशोर कांवरे के परिवार से जुड़ी हर्ष इंडस्ट्रीज भी है। पुलिस ने फैक्ट्री से डीवीआर और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं तथा संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है।खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि एथेनॉल प्लांट केंद्र सरकार के अधीन आते हैं, इसलिए राज्य सरकार की इसमें प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। वहीं, एफसीआई की दिल्ली मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालय की टीमें भी समानांतर जांच कर रही हैं।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह जांच सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित रहेगी, या फिर छत्तीसगढ़ समेत दूसरे राज्यों में भी इस नेटवर्क की नई कड़ियां सामने आएंगी।

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