पाटन : दुर्ग जिले के बेलौदी गांव में फैले डायरिया और कै-दस्त के प्रकोप के बीच मंगलवार को गांव का माहौल उस वक्त भावुक हो गया, जब Bhupesh Baghel अचानक अपने गृह ग्राम बेलौदी पहुंचे। पूर्व मुख्यमंत्री ने गांव और पाटन अस्पताल पहुंचकर पीड़ित मरीजों से मुलाकात की, उनका हालचाल जाना और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इलाज एवं व्यवस्थाओं की जानकारी ली।बेलौदी गांव में अब तक 55 से ज्यादा महिला, पुरुष और बच्चे डायरिया की चपेट में आ चुके हैं। मंगलवार को भी पांच नए मरीज सामने आए। हालांकि स्वास्थ्य विभाग स्थिति को नियंत्रण में बता रहा है, लेकिन गांव में अब भी दहशत का माहौल बना हुआ है।

भूपेश बघेल ने अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत की। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि इलाज, दवाइयों और साफ पेयजल की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। इस दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा भी दिलाया।पूर्व मुख्यमंत्री मृतक सरस्वती निषाद के घर भी पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार को शव परिजनों को सौंप दिया गया। गांव में इस मौत के बाद लोगों में डर और गुस्सा दोनों देखने को मिल रहा है।
इधर बीमारी फैलने की वजह को लेकर गांव में अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि डायरिया फैलने से पहले लगातार तीन दिनों तक बेलौदी बांध में बड़े पैमाने पर मछली पकड़ी गई थी, जिसे गांव में खूब खाया गया। वहीं कई मरीजों ने गुपचुप खाने के बाद तबीयत बिगड़ने की बात कही है।स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के मल और पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। टीम गांव में लगातार कैंप लगाकर इलाज और निगरानी कर रही है।
वहीं पाटन के एसडीएम Lovkesh Dhruv भी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने गांव और अस्पताल पहुंचकर स्वास्थ्य विभाग के साथ समीक्षा की।अब पूरे मामले में जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे साफ होगा कि आखिर बेलौदी में फैली इस गंभीर बीमारी की असली वजह दूषित मछली थी, गुपचुप था या फिर पानी में संक्रमण।