रायगढ़ : जिले के घरघोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम नावपारा टेड़ा में फ्लाई ऐश (राख) के अवैध डंपिंग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर कृषि भूमि पर राख डाले जाने से किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। आरोप है कि नियमों के विपरीत कार्य हो रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में बड़े पैमाने पर फ्लाई ऐश का परिवहन और डंपिंग की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उपजाऊ जमीन प्रभावित हो रही है और खेती की स्थिति खराब होती जा रही है। कई स्थानों पर खेतों के आसपास राख के ढेर देखे जा सकते हैं।

मंत्री का ‘मॉडल SOP’ धुएं में उड़ गया :-
विधानसभा में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने साफ कहा था कि कृषि और वन भूमि पर फ्लाई ऐश डालना प्रतिबंधित है। ‘मॉडल SOP’ की बात कर सख्ती का दावा किया गया था, लेकिन नावपारा टेड़ा की तस्वीरें इस दावे की पोल खोल रही हैं। जमीनी स्तर पर न नियम दिख रहे हैं, न कार्रवाई।
राजस्व विभाग का खेल: नियम नहीं, ‘कॉलम’ से चल रही व्यवस्था :-

पूरे मामले में राजस्व अमले की भूमिका संदेह के घेरे में है—नायब तहसीलदार: खसरा नंबर 311/4 पर ‘पर्यावरण स्वीकृति’ का हवालापटवारी लोकेश पैकरा: “रिपोर्ट में बगल की खेती लिखने का कॉलम नहीं था”।
किसानों की जमीन पर ‘राख का कब्जा’जिस खेत में धान लहलहाना चाहिए था—वहां अब जहरीली राख के ढेर नजर आ रहे हैं।
गरीब और भूमिहीन किसानों की जमीन पर।
रसूखदारों और ऐश कारोबारियों की नजरसरकारी योजनाएं एक तरफ, और जमीनी हकीकत दूसरी तरफ खड़ी नजर आ रही है।

गरीब किसानों के कंधों पर भारी बोझसरकार जमीन देकर गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने का दावा करती है, लेकिन उद्योगपतियों और रसूखदारों की निगाहें इसी जमीन पर टिकी हैं। जिस पर धान की फसल उगनी चाहिए थी, वहां जहरीली फ्लाई ऐश का काला साम्राज्य खड़ा हो गया है।भविष्य खतरे में: जहर मिट्टी और फेफड़ों मेंउड़ती राख मिट्टी की उर्वरता को नष्ट कर रही है और ग्रामीणों के फेफड़ों में घातक जहर भर रही है। यह केवल भूमि कब्जे का मामला नहीं, बल्कि पूरे समाज और सभ्यता के लिए खतरे की घंटी है।